लोकसभा में 3 विधेयक पारित, दिल्ली को लेकर केंद्र के अध्यादेश पर चर्चा आज, BJP-AAP होगी आमने- सामने
संसद का मानसून सत्र पिछले हफ्ते हंगामे की भेंट चढ़ गया था। लेकिन इस सप्ताह लोकसभा ने तीन निधेयक पारित किए हैं। बुधवार को अब दिल्ली सरकार को लेकर केंद्र के अध्यादेश पर चर्चा होगी।
लोकसभा ने मंगलवार को तीन विधेयक पारित किए और दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण पर अध्यादेश को बदलने के लिए एक विधेयक सदन में पेश किया गया। लोकसभा में मंगलवार को पारित विधेयकों में 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023', 'अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023' और 'संविधान संशोधन विधेयक 2023'(अनुसूचित जातियां) शामिल हैं। जबकि बुधवार को सदन में दिल्ली सरकार के अधिकारों को सीमित करने वाले विधेयक पर चर्चा होगी।
इसके अलावा मंगलवार को लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पेश किया। जिस पर आज (2 अगस्त) को चर्चा होगी। ये विधेयक विचार विमर्श और पारित होने के लिए पटल पर रखा जाएगा।

वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने लोकसभा सांसदों को सरकार के रुख और कुछ विधायी कार्यों का समर्थन करने के लिए बुधवार को पूरे दिन उपस्थित रहने का निर्णय किया है। इसके लिए पार्टी ने तीन-लाइन व्हिप जारी किया,जिसे सदन में चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया जाएगा।
मंगलवार को इस विधेयक का अधीर रंजन चौधरी, एनके प्रेमचंद्रन और शशि थरूर सहित विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पेश करने का विरोध किया। विपक्षी दल मणिपुर हिंसा से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर सदन में नारेबाजी की। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि जब तक सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा लंबित है तो विधेयक लाने का कदम नहीं उठाया जा सकता। विधेयक के विरोध में शशि थरूर ने कहा कि संसद में दिल्ली (एनसीटी) अध्यादेश विधेयक पर केवल एक परिचय हुआ। इस पर बहस नहीं हुई। इसका विरोध करना हमारा अधिकार है।
वहीं रिवोल्यूशनिस्ट सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने बिल को लेकर लोकसभा की विधायी क्षमता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "अगर यह विधेयक पारित हो गया तो दिल्ली में सरकार का कोई मतलब नहीं है। यह नौकरशाहों के माध्यम से चुनी हुई सरकार से विधायी शक्तियां छीन रहा है और सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी कर रहा है।"
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "अनुच्छेद 123 का उल्लंघन है। यह शक्तियों के पृथक्करण सिद्धांत का उल्लंघन है। इसमें कोई विधायी क्षमता नहीं है। मैं मतों के विभाजन की मांग करता हूं।"
वहीं केंद्र के विधेयक का वाईएसआरसीपी ने समर्थन किया है। सांसद विजयसाई रेड्डी ने कहा, "वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और हमारे नेता वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इसका समर्थन करने का निर्णय लिया है और हम विधेयक का समर्थन करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि विधेयक संसद में पारित हो।"












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