साल 2016 में आज ही के दिन आईबी ने बचाई थी 1,000 अमरनाथ यात्रियों की जान
नई दिल्ली। सोमवार को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने सात अमरनाथ यात्रियों को एक आतंकी हमले में मार डाला। इस आतंकी हमले ने इंटेलीजेंस ब्यूरों (आईबी) के ठीक एक वर्ष पहले हुए उस एक ऑपरेशन की याद दिला दी है जिसनें 1,000 तीर्थयात्रियों की जिंदगियों को बचाया था। यह ऑपरेशन वर्ष 2016 में हुआ था और उस समय घाटी में हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था।

क्या हुआ था 2016 में
हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से हजारों तीर्थयात्री जम्मू कश्मीर में फंस गए थे। ये सभी तीर्थयात्री अनंतनाग में फंसे हुए थे। इन यात्रियों को बस के जरिए पहलगाम भेजने की तैयारियां की जा रही थीं। उसी समय आईबी को इंटेलीजेंस मिली कि करीब चार आतंकी बसों पर हमले के लिए तैयार हो चुके हैं। इस जानकारी को तुरंत ही लोकल अथॉरिटीज के साथ शेयर किया गया। इसके बाद यात्रियों को भेजने की योजना कुछ समय के लिए टाल दी गई। आईबी अधिकारियों को जो अलर्ट मिला था उसमें कहा गया था कि अनंतनाग में यात्रियों पर हमले के लिए आतंकी तैयार हैं। पहलगाम भेजे जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा थी और आईबी ने समय रहते अगर मुस्तैदी न दिखाई होती तो एक बड़ा आतंकी हमला हो जाता।
70 बसों में थे तीर्थयात्री
तीर्थयात्रियों से भरी करीब 70 बसें अनंतनाग से निकलने का इंतजार कर रही थीं। आईबी अधिकारियों ने अथॉरिटीज को सख्त आदेश दिया था कि जब तक उनकी तरफ से ग्रीन सिग्नल न मिले बसों को रवाना न किया जाए। आतंकियों ने उसी जगह पर कई घंटों तक इंतजार किया। रात में करीब 10:30 बजे आईबी की तरफ से सिग्नल आया। तब तक आतंकी उस जगह से रवाना हो चुके थे क्योंकि वे यह मान चुके थे कि अब यहां से कोई बस रवाना नहीं होगी। आतंकियों के रवाना होने के बाद ही आईबी ने ग्रीन सिग्नल दिया और बसें सुरक्षित रवाना हो सकीं।












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