नेपाल की संसद में उठा योगी आदित्यनाथ का मुद्दा, पीएम ओली बोले हमें धमकाना उचित नहीं
नई दिल्ली- नेपाल की संसद में बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर खूब बहस हुई। इसके जवाब में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि आदित्यनाथजी को नेपाल को धमकी देना सही नहीं है और उसके बारे में भारत सरकार को उन्हें बता देना चाहिए। दरअसल, योगी ने कालापानी मुद्दे को लेकर नेपाल की हरकतों के बारे में कहा था कि उसे यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि तिब्बत का क्या अंजाम हुआ। असल में उन्होंने बिना नाम लिए चीन को लेकर नेपाल सरकार को आगाह करने की कोशिश की थी। लेकिन, नेपाल में अभी वामपंथी विचारधारा की सरकार है, जिसमें चीन की दखलअंदाजी बहुत ज्यादा बताई जा रही है।

आदित्यनाथजी की टिप्पणी उचित नहीं- नेपाली प्रधानमंत्री
बुधवार को नेपाली संसद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी मामला उठाया गया। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ने योगी का नाम लेकर कहा कि उनसे कहा जाना चाहिए कि वो नेपाल को धमकी न दें। ओली ने ये बातें नेपाल के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में कही हैं। ओली ने नेपाली संसद में कहा, 'उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथजी ने नेपाल के बारे में कुछ बातें कही हैं। उनकी टिप्पणी अनुचित है और सही नहीं है। केंद्र सरकार (भारत) में किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को उनसे अनुरोध करना चाहिए कि उन्हें उन मुद्दों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और उन्हें बताया जाना चाहिए कि नेपाल को धमकाने वाले बयानों की निंदा की जाएगी। ' ओली ने आदित्यनाथ को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में ये बातें कही हैं।

नए नक्शे पर नेपाली संसद से मुहर लगाने की तैयारी
ओली ने कहा है कि 'अगर भारत बातचीत में और रुचि दिखाता है तो एक हल खोजा सकता है।' उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भारत के साथ कालापानी विवाद का हल निकालने की कोशिश की है, लेकिन भारत को आदित्यनाथ से कहना चाहिए कि 'नेपाल को धमकी देना उचित नहीं है।' उन्होंने कहा कि '1961 और 62 से भारत ने कालापानी में अपनी सेना के जवानों को तैनात कर रखा है। लेकिन, वह जमीन हमारी है। भारत कृत्रिम काली नदी के आधार पर इस क्षेत्र पर अपना दावा दिखा रहा है। उन्होंने उस इलाके में देवी काली का एक मंदिर भी बना लिया है, जबकि वह क्षेत्र हमारा है। लेकिन, हमारा दावा ऐतिहासिक दस्तावेजों और तथ्यों पर आधारित है।' बता दें कि नेपाली संसद में वहां के नए राजनीतिक नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा कानूनी रूप से अपना बताने के लिए दूसरे संविधान संशोधन पर बहस चल रही है।

योगी आदित्यनाथ ने ऐसा क्या कहा था ?
बता दें कि कालापानी क्षेत्र पर नेपाल के दावे के बारे में योगी आदित्यनाथ ने पिछले हफ्ते कहा था कि, 'अपने देश की राजनैतिक सीमाएं तय करने से पहले नेपाल को उसके परिणामों के बारे में भी सोच लेना चाहिए। उन्हें यह भी याद करना चाहिए कि तिब्बत का क्या हश्र हुआ?' यूपी के मुख्यमंत्री ने नेपाल के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते का हवाला देते हुए कहा था कि भारत और नेपाल भले ही दो देश हों, लेकिन यह एक ही आत्मा हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं, जो सीमाओं के बंधन से तय नहीं हो सकते। उन्होंने कहा था कि नेपाल की सरकार को हमारे रिश्तों के आधार पर ही कोई फैसला करना चाहिए। अगर वह नहीं चेता तो उसे तिब्बत का हश्र याद रखना चाहिए।

काली नदी का मुद्दा है क्या ?
हिमालय के क्षेत्र में कालापानी इलाका अपने सामरिक महत्त्व की वजह से अहम हो जाता है। यहां नेपाल भारत से इस नदी के उद्गम को लेकर विवाद कर रहा है। नेपाल का दावा है कि यह नदी हिमालय के ऊपरी इलाके में लिंपियाधुरा से निकलती है, जिसकी वजह से लिपुलेख दर्रे समेत उस त्रिकोणीय जमीन पर उसका दावा बनता है। जबकि, भारत कहा कहना है कि यह नदी लिंपियाधुरा से नहीं उससे नीचे एक स्थान से निकलती है। नेपाल की मानसिकता पर सवाल इसलिए लिए उठ रहा है कि उसने अचानक भारतीय इलाके को अपना क्यों बताना शुरू कर दिया है, जबकि उसे पूरी तरह से पता है कि इससे नेपाल की जनता को तो कुछ समय के लिए भटकाया जा सकता है, लेकिन वह उस जमीन को कभी हासिल नहीं कर सकता।

ओली के दिमाग में कुछ और भी खिचड़ी पक रही है
ओली ने नेपाली संसद में जो कुछ कहा है उससे अंदाजा लग सकता है कि उनके दिमाग में भारत के साथ सीमा को लेकर कुछ और भी उथल-पुथल चल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ सीमा पर कुछ और भी विवाद हैं, विशेष तौर पर यूपी-बिहार के बॉर्डर पर सुस्ता में लेकिन, फिलहाल उनकी सरकार पहले कालापानी मुद्दे पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा, 'कालापानी को लेकर मुख्य विवाद है और हमें पूरा विश्वास है कि हम राजनयिक तरीके से अपना जमीन वापस लेंगे, क्योंकि हमारे पास यह साबित करने के लिए सबूत मौजूद हैं कि नेपाल ही उस इलाके का असल मालिक है।'
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