द इकोनॉमिस्ट ने दी नरेंद्र मोदी के लिए वोट न डालने की सलाह

गलत होगा मोदी का चुनाव
लंदन के इस साप्ताहिक न्यूजपेपर ने शुक्रवार को लिखा है कि बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का समर्थन इकॉनोमिस्ट की ओर से नहीं किया गया है। अखबार के मुताबिक वह एक ऐसे चेहरे के तौर पर सामने आ रहे हैं जो देश में बनने वाली अगली सरकार के मुखिया होंगे लेकिन एक ऐसा व्यक्ति जो भारत जैसे देश में लोगों के बीच भेदभाव को पैदा कर रहा है, उसके लिए देश का प्रधानमंत्री बनना गलत होगा।
इकोनॉमिस्ट के मुताबिक गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका की वजह से वह मोदी का विरोध करते आए हैं। वह एक ऐसे राज्य के मुख्यमंत्री थे जहां पर वर्ष 2002 में हुए दंगों में 1,000 लोग मारे गए जिसमें से ज्यादातर मुसलमान थे। इकोनॉमिस्ट ने नरेंद्र मोदी की गुजरात में आर्थिक सुधारक के तौर पर तारीफ की है लेकिन साथ ही वर्ष 2002 में जो कुछ भी हुआ उसके लिए उनकी खासी आलोचना भी की है।
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इकोनॉमिस्ट के मुताबिक या तो नरेंद्र मोदी 2002 में जो कुछ भी हुआ उसे विस्तृत तौर पर सबकों बताए या तो वह इसके लिए माफी मांगे। इकोनॉमिस्ट ने हैरानी जताई है कि कैसे मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की ओर से जारी समस्याओं का समाधान करेंगे।
हालांकि इकोनॉमिस्ट ने यह भी साफ किया है कि इस लेख के जरिए अखबार राहुल गांधी या फिर कांग्रेस का प्रचार नहीं करना चाहता है। इकोनॉमिस्ट ने लिखा है कि उसे राहुल गांधी या फिर कांग्रेस के नेतृत्व से कोई उम्मीदें नहीं हैं लेकिन साथ ही अखबार भारत के लोगों को सलाह देते हैं कि वह कम निराशाजनक विकल्प का चुनाव करें।
बीजेपी को कोई फर्क नहीं
इकोनॉमिस्ट के इस लेख पर बीजेपी की प्रवक्ता निर्मला सीतारमने पार्टी की ओर से नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए कहा कि अखबार के इस लेख में निष्पक्षता की कमी है और यह पूरी तरह से एक पार्टी का पक्ष लेते हुए लिखा गया है। वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अमृतसर से चुनाव लड़ने वाले अरुण जेटली ने इस लेख के बारे में ट्विटर पर लिखा कि शुक्र है इकोनॉमिस्ट को देश में वोट नहीं डालना है।












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