बिहार-नेपाल सीमा पर तनाव : एक शादी जो बनी बर्बादी की वजह, सरहद पार बदल रहा रोटी-बेटी का रिश्ता
नई दिल्ली। बिहार के सीतामढ़ी जिले के लालबंदी नेपाल बोर्डर पर तनाव की स्थिति है। नेपाल पुलिस की फायरिंग में एक भारतीय के मारे जाने के बाद सीमा पर सशस्त्र सीमा बल ने गश्त बढ़ा दी है। मरने वाला युवक सीतामढ़ी के जानकी नगर का रहने वाला है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब भारत (जानकी नगर) की बहू और नेपाल की लड़की अपने माता पिता से मिलने सीमा पर गयी थी। आखिर ऐसा क्या हुआ कि नेपाल के सुरक्षा प्रहरियों ने भारतीय लोगों पर गोली चला दी ? नक्शा विवाद के बीच हुई इस घटना ने भारत-नेपाल रिश्तों में कड़वाहट घोल दी है। बिहार के सीमावर्ती गांव जो नेपाल को अपना मानते थे, अब उनमें रोष है। अब भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता बहुत तेजी से बदल रहा है। नेपाल के नये राजनीतिक परिवेश ने रिश्तों में कड़वाहट घोल दी है। बिहार के दरभंगा में जन्म लेने वाले परमानंद झा नेपाल के पहले उपराष्ट्रपति बने थे। उन्होंने पांच साल पहले कहा था, अगर स्थिति नहीं बदली तो भारत और नेपाल के बीच रोटी बेटी का संबंध इतिहास बन कर रह जाएगा। उनकी आशंका अब सच होती लग रही है।

सरहद ने बांटा लेकिन दिल से एक
बिहार के सात जिलों- सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल की सीमा नेपाल से मिलती है। नेपाल के दक्षिणी भाग को मधेश कहा जाता है। मधेश में नेपाल के 22 जिलें हैं जो बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा से मिलते हैं। मधेश और बिहार-यूपी के लोगों की भाषा, संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान एक जैसा है। अंतर सिर्फ नागरिकता का है। मधेशी लोग हिन्दी, भोजपुरी, अवधी, मौथिली बोलते हैं। इतनी अधिक समानता होने के कारण दोनों देशों की सीमा पर बसे लोग आपस में शादी विवाह करते रहे हैं। पहले नागरिकता को लेकर नेपाल उदार था इसलिए रिश्तेदारी आसान थी। लेकिन जब नेपाल में उग्र वामपंथी दलों का सत्ता में प्रभाव बढ़ा है नेपाल के राजनीति-सामाजिक सोच में बहुत बदलाव आया है। नेपाल के धुर वामपंथी चीन के प्रभाव में हैं। उत्तरी नेपाल यानी पर्वतीय क्षेत्र के नेता मधेशियों को भारत से प्रेरित मानते हैं। इसलिए वे मधेशी लोगों के साथ भेदभाव की नीति अपनाते हैं। इसी सोच के कारण नेपाल में हिन्दी को सरकारी मान्यता नहीं दी गयी है। उत्तरी नेपाल के नेताओं को लगता है कि हिन्दी को मान्यता देने से मधेशियों और भारत का नेपाल में प्रभाव बढ़ जाएगा।

अब नेपाल में शादी जी का जंजाल
पहले नेपाल में दोहरी नागरिकता का प्रवाधान था। बिहार-यूपी के किसी गांव की लड़की का विवाह अगर नेपाल में होता था तो उसे नेपाल की नागरिकता मिल जाती थी। लेकिन 2017 में नेपाल की सरकार नागरिकता कानून को सख्त कर दिया। अब अगर किसी भारतीय लड़की की नेपाल में शादी होती हो तो भारत की नागरिकता छोड़नी पड़ेगी। साथ ही उस लड़की को नेपाल के किसी समाचार पत्र में शादी का ब्योरा भी प्रकाशित कराना होगा। इसके बाद उसे नेपाली नागरिकता के लिए आवेदन देना होगा। सभी शर्तों को पूरा करने के बाद ही विवाहित लड़की को नागरिकता मिलती है। नागरिकता कानून के कड़े होने के बाद अब बिहार के लोग नेपाल में शादी नहीं करना चाहते। लेकिन जो पहले से कुटुम्ब बने हुए हैं उनको अब बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इनका मिलना-जुलना मुश्किल हो गया है।

समधी मिलन तो हुआ नहीं चल गयी गोली
12 मई 2020 को सीतामढ़ी-नेपाल बोर्डर पर दोनों देशों के दो संबंधी मिलना चाहते थे। लेकिन मिलने की ये कोशिश मौत और विवाद का कारण बन गयी। सीतामढ़ी का जानकी नगर टोला नेपाल की सीमा पर है। जानकी नगर के रहने वाले लगन राय के बेटे की शादी नेपाल के सरलाही की लड़की से हुई है। लगन राय की बहू बहुत दिनों से अपने माता-पिता से मिल नहीं पायी थी। इस बीच लॉकडाउन लागू हो गया जिससे बहू को अपने मायके का कोई समाचार नहीं मिला। 12 जून को भारत-नेपाल सीमा के लालबंदी बोर्डर पर दोनों संबंधियों को मिलना था। लगन राय अपने बेटे और बहू के साथ बोर्डर पर गये थे। सरलाही से भी लगन राय के समधी और समधन सीमा पर आये हुए थे। नेपाल सशस्त्र प्रहरी बल ने सीमा सील होने का हवाला देकर बिहार से आये लोगों को रोक दिया। लगन राय ने उनसे कुछ देर की मोहलत मांगी तो नेपाली प्रहरियों ने इंकार कर दिया। इसके बाद जो हुआ वह बहुत दुखद था। विवाद बढ़ने पर नेपाली प्रहरियों ने गोलीबारी कर दी जिसमें एक भारतीय की मौत हो गयी।

प्राचीन रिश्ते को भी भुला रहा नेपाल
बिहार के सीतामढ़ी का नेपाल के जनकपुर और धनुषा शहर से प्राचीनी रिश्ता रहा है। जनकपुर प्राचीन मिथिला की राजधानी थी। मिथिला के राजा जनक थे। मान्यता है कि जनकनंदनी सीता का जन्म सीतामढ़ी के पुनौरा गांव में हुआ था। इसी गांव में जब राजा जनक खेत में हल चला रहे थे तब माता सीता कलश से प्रगट हुई थीं। जनकपुर जनक की राजधानी थी। आधुनिक सीतामढ़ी से नेपाल के जनकपुर की दूरी 58 किलोमीटर है। मान्यता है कि जब श्रीराम ने स्वयंवर में शिवजी के विशाल धनुष पिनाकी की प्रत्यंचा चढ़ायी थी तो वह तीन टुकड़ों में विभक्त हो गया था। धनुष का भाग धनुषा में गिरा था। धनुषा अब नेपाल का एक जिला है। आज भी धनुषा में एक मंदिर है जहां एक पत्थर को शिवजी के धनुष का अवशेष माना जाता है। जनकपुर भी धनुषा जिले में ही आता है। अयोध्या के राजा श्रीराम की ससुराल जनकपुर में थी। यानी प्रचीन काल से ही भारत और नेपाल में प्रगाढ़ संबंध रहा है। आधुनिक काल में यह संबंध परवान चढ़ता रहा है। धनुषा जिले के रहने वाले और भारत में पढ़ाई करने वाले डॉ. रामवरण यादव नेपाल के पहले राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने कोलकाता से मेडिकल की पढ़ाई की थी। इसी तरह दरभंगा में जन्म लेने वाले परमानंद झा नेपाल के पहले उपराष्ट्रपति बने थे। ये दोनों नेता मधेशी थे। लेकिन अब नेपाल में मधेशियों से दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। सत्तारुढ़ वामपंथी नेता नेपाल के युवा वर्ग में भारत विरोधी भावनाएं भड़का रहे हैं। चीन के इशारे पर अब नेपाल, भारत से शत्रुता का भाव रखने लगा है।
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