Telangana election: ग्रेटर हैदराबाद में वोटर ही क्यों बन जाते हैं चुनौती? 24 सीटों से निकलेगा सत्ता का रास्ता
Telangana election 2023: तेलंगाना में विधानसभा की सभी 119 सीटों पर 30 नवंबर को वोटिंग होनी है। यहां की तकरीबन एक-चौथाई सीट ग्रेटर हैदराबाद के दायरे में ही आती हैं।
ग्रेटर हैदराबाद देश का वह इलाका है, जहां ओल्ड सिटी की भीड़ भी मौजूद है तो स्काईस्क्रैपरों की भरमार भी है। यह शहर देश के आईटी हब के तौर पर भी उभरा है तो साइंस-टेक और हेल्थ सेक्टर की अन्य कंपनियों के लिए भी दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने यहां का रुख किया है।

बीआरस ने ग्रेटर हैदराबाद में झोंकी पूरी ताकत
एक साथ 24 विधानसभा सीटों की वजह से इस बार भी ग्रेटर हैदराबाद में सत्ताधारी बीआरएस पूरा जोर लगा रही है तो कांग्रेस और बीजेपी भी धुआंधार प्रचार अभियान में जुटी है। बीआरएस की ओर से केटी रामा राव गुरुवार को रोड शो कर गए हैं तो सीएम केसीआर परेड ग्राउंड में 25 नवंबर को जनसभा करने वाले हैं। पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता यहां की सीटों पर चुनाव प्रचार में शामिल हैं।
बीजेपी-कांग्रेस का भी जोरदार प्रचार जारी
तेलंगाना में ग्रेटर हैदराबाद की अहमियत का अंदाजा इसी से लग सकता है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में यहां दो-दो जनसभाएं कर चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी शुक्रवार को यहां पहुंच रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस नेता भी आने वाले दिनों में यहां कई रोड शो करने वाले हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी अपनी ओर से इस बार पूरी ताकत झोंकना चाहते हैं। राजेंद्रनगर में कांग्रेस ने उनके कार्यक्रम के लिए पूरा जोर लगा दिया।
2018 में बीआरएस को मिली थी कामयाबी
2018 के चुनाव में केसीआर की पार्टी ने यहां अधिकतर सीटें जीती थी और उसकी सहयोगी असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को 8 में से 7 सीटों पर सफलता मिली थी। लेकिन, कांग्रेस को इस बार एंटी-इंकंबेसी पर यकीन है।
इस बार बीजेपी ने लगाया है पूरा जोर
वहीं बीजेपी को एंटी-इंकंबेंसी के अलावा 2020 के ग्रेटर हैदराबाद निगम चुनाव में मिली अप्रत्याशित सफलता और 2019 में सिकंदराबाद लोकसभा सीट पर शानदार जीत पर भरोसा है।
पार्टी ने जीएचएमसी चुनाव में बीआरएस से कुछ ही सीटें कम यानि 48 सीटें जीतकर तहलका मचा दिया था। 2018 में पार्टी गोशामहल सीट भी जीती थी और इस बार भी अपने मौजूदा विधायक टी राजा सिंह को वहीं से उतारकर हवा बनाने की कोशिश की है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व शुरू से इस इलाके में अधिकतर सीटें जीतने पर जोर दे रहा है।
कांग्रेस ने पिछली बार बीआरएस को दी थी कड़ी टक्कर
कांग्रेस के पक्ष में ये बात है कि उसने ग्रेटर हैदराबाद में तीन सीटें जीती थी और कई सीटों पर बहुत कम वोटों से बीआरएस से मुकाबला हारी थी। पार्टी ने मल्काजगिरि लोकसभा सीट भी जीती थी।
मतदान से बेरुखी दिखाते रहे हैं यहां के वोटर
लेकिन, ग्रेटर हैदराबाद की सीटों पर सभी दलों के लिए चुनौती वोटर हैं, क्योंकि उनमें मतदान के प्रति हद दर्जे की बेरुखी देखी गई है। आम चुनावों और यहां तक कि जीएचएमसी चुनाव में भी 60% वोटिंग तक नहीं हो पाई। शहरी वोटरों की यह उदासीनता चुनाव आयोग के लिए भी चिंता की वजह रही है।
पिछले चुनावों में हैदराबाद में वोटिंग का ट्रेंड
2018 के विधानसभा चुनावों में हैदराबाद में 51% से भी कम वोटिंग दर्ज हुई। हालांकि, 2014 में इससे करीब दो फीसदी अधिक या लगभग 53% वोटिंग हुई थी। वहीं जीएचएमसी चुनावों में मतदान का प्रतिशत आधे से भी कम यानि 49.8% रह गया था।
हैदराबाद जैसे शहर में जहां बड़ी आबादी ऊंचे दर्जे की शिक्षित मानी जाती है, लोकतंत्र के महापर्व के प्रति उनकी यह उदासीनता बहुत बड़ी चुनौती लगती है। बड़ा सवाल है कि इस बार चले जागरूकता अभियानों का इसपर कितना असर पड़ता है।












Click it and Unblock the Notifications