Telangana: रेवंत रेड्डी कहां से लाएंगे फंड, वादे निभाने के लिए कितनी रकम चाहिए? जानिए

तेलंगाना में कांग्रेस को उसकी 6 गारंटियों और लोक-लुभावन वादों ने भले ही कुर्सी दिला दी हो, लेकिन वादे पूरे करने में रेवंत रेड्डी की नई सरकार को नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं।

कांग्रेस जिस तरह के वादों के दम पर चुनाव जीत कर आई है, कुछ गारंटियों को वह ज्यादा दिन तक टाल भी नहीं सकती। लेकिन, राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए उसकी सरकार के सत्ता में आते ही उसके सामने चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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कांग्रेस सरकार पर इन वादों को पूरा करने का होगा दबाव
तेलंगाना के वोटरों से वादे करने में कांग्रेस ने सत्ताधारी बीआरएस को काफी पीछे छोड़ दिया था। किसानों के 2 लाख रुपए तक की लोन माफी, महिलाओं को टीआरटीसी की बसों में मुफ्त यात्रा, महिलाओं का 2,500 रुपए मासिक वित्तीय सहायता, किसानों को रायतु भरोसा के तहत 16,000 रुपए प्रति एकड़ की सहयता, 500 रुपए में एलपीजी गैस सिलेंडर और 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना आसान नहीं लग रहा।

करीब 68,652 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड चाहिए-रिपोर्ट
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के इन वादों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को अनुमानित तौर पर करीब 68,652 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड चाहिए।

किन वादों की कितनी कीमत?
अगर अलग-अलग वादों के हिसाब से देखें तो किसानों की 2 लाख रुपए तक की ऋण माफी का मतलब 19,191 करोड़ रुपए का फंड चाहिए। 200 यूनिट फ्री बिजली के लिए 2,500 करोड़ रुपए अलग जुटाने पड़ेंगे।

इसी तरह रसोई गैस पर अतिरिक्त सब्सिडी देने के लिए 3,199 करोड़ रुपए चाहिए, ताकि लाभार्थियों को 500 रुपए का एक गैस सिलेंडर मिल सके। गरीबों को इंदिरामम्मा घर बनाने के लिए 5 लाख रुपए सरकार देगी तो उसके लिए भी 9,202 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।

दलित बंधु के लिए सालाना 40,000 करोड़ रुपए का बजट रखना होगा। महालक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को 2,500 रुपए मासिक देने के लिए सालाना 24,000 करोड़ रुपए जुटाने होंगे।

1.2 लाख करोड़ रुपए तक खर्च आने का अनुमान
लोकसत्ता के फाउंडर जयप्रकाश नारायण के मुताबिक, 'कांग्रेस सरकार को मौजूदा योजनाओं के साथ ही विभिन्न योजनाओं को शुरू करने के लिए 1.2 लाख करोड़ रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इनके अलावा 20,000 करोड़ रुपए 2 लाख रुपए तक लोन माफी के लिए चाहिए।'

'देश में संभवत: अबतक का सबसे ज्यादा वादा'
उन्होंने बताया कि 'राज्य का बजट 1.9 लाख रुपए का है, जबकि 2022-23 में सरकारी राजस्व और राजस्व व्यय लगभग बराबर यानि 1,72,000 करोड़ रुपए सालाना है।' उनका कहना है कि 'तेलंगाना में जो वादे किए गए हैं, वह देश में संभवत: अबतक का सबसे ज्यादा है।'

विकास के लिए कहां से लाएंगे फंड?
एक पूर्व मुख्य सचिव ने कहा कि, 'अगर सारा बजट कल्याणकारी योजनाओं, वेतन और पेंशन पर चला जाएगा तो इंफ्रास्ट्रक्चर के काम जैसे-रोड, पुल निर्माण और बड़ी परियोजनाओं के लिए कोई फंड ही नहीं बचेगा।'

संकटग्रस्त निगम पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ
एक एक्सपर्ट के मुताबिक सच्चाई है कि टीएसआरटीसी जैसे कई निगम पहले ही वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को मुफ्त यात्रा का वादा पूरा करने पर सालाना करीब 10,000 रुपए का खर्च आएगा। इसी तरह 200 यूनिट फ्री बिजली का मतलब होगा कि डिस्कॉम कंपनियों को अन्य सब्सिडी के अलावा सालाना 5,000 करोड़ रुपए अलग से देने पड़ेंगे।

तेलंगाना में वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके कुछ वरिष्ठ अफसरों का कहना है कि वादे निभाने के लिए सरकार को और उधार लेने पड़ सकते हैं। लेकिन, वास्तविकता ये कि राज्य बजट मैनेजमेंट की सीमाओं को पहले ही पार कर चुका है। मतलब यह और लोन लेने की स्थिति में नहीं है।

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