Lok Sabha Election: तेलंगाना में BRS को मिला नया साथी, गठबंधन में लड़ेगी चुनाव, किसका बिगड़ेगा गणित?
Lok Sabha Election News: तेलंगाना की मुख्य विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) लोकसभा चुनाव कभी गठबंधन में नहीं लड़ी है। लेकिन, इस बार पार्टी को मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के रूप में नया साथी मिल गया है। बीआरएस, बीएसपी के लिए दो सीटें छोड़ेगी।
इस बार का लोकसभा चुनाव तेलंगाना में बीआरएस और बीएसपी दोनों साथ मिलकर लड़ेंगी। यह बसपा का भी राज्य में यह पहला चुनाव पूर्व गठबंधन होगा।

तेलंगाना में बीआरएस-बीएसपी में गठबंधन
इस गठबंधन को लेकर पहले बीआरएस चीफ और पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव और तेलंगाना के बसपा अध्यक्ष आरएस प्रवीण कुमार के बीच एक शुरुआती चर्चा हुई थी। लेकिन, अब दोनों दलों के बीच डील पक्की हो गई है और बीआरएस चीफ के चंद्रशेखर राव ने बसपा के लिए दो सीटें छोड़ने की घोषणा भी कर दी है।
बसपा के लिए 2 सीट छोड़ेगी बीआरएस
केसीआर ने बीएसपी के लिए 2 सीटें छोड़ने की घोषणा की है। प्रदेश बसपा अध्यक्ष प्रवीण कुमार पहले ही कह चुके थे कि वह नगरकुर्नूल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। पिछली बार इस सीट से बीआरएस के पोथुगंती रामुलु चुनाव जीते थे, लेकिन कुछ समय पहले वे पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। केसीआर ने इसके अलावा हैदराबाद सीट भी बीएसपी को देने का फैसला किया है।
2019 में कैसा रहा था बसपा का प्रदर्शन?
2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा तेलंगाना की 17 में से 5 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। तब नगरकुर्नूल में पार्टी को पांचों सीटों में से सबसे ज्यादा यानी 1.26% वोट मिले थे। अन्य चारों सीटों पर उसे 1% या उससे कम वोट मिले थे।
हैदराबाद लोकसभा सीट बीएसपी को देने का मतलब है कि यहां केसीआर को अपने पुराने साथी ओवैसी के सामने पार्टी का उम्मीदवार नहीं उतारना पड़ेगा।
2023 के चुनावों इन दलों का प्रदर्शन
लेकिन, पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में बीएसपी राज्य की 119 सीटों में से 107 पर चुनाव लड़ी थी औ उसका वोट शेयर 1.38% रहा था। जबकि, बीआरएस को इस चुनाव में 37.62% वोट मिले थे। वहीं 64 विधायकों के साथ सरकार बनाने वाली कांग्रेस को 39.69% मिले थे।
कांग्रेस के वोट शेयर के लगभग बराबर पहुंच सकता है बीआरएस का वोट शेयर
इस तरह से अगर बीएसपी और बीआरएस का वोट शेयर जोड़ देने पर यह आंकड़ा 39% पहुंच जाता है और केसीआर को इसी आंकड़े में उम्मीद दिख रहा है।
क्योंकि, यह लोकसभा चुनाव है, जिसमें राष्ट्रीय मुद्दों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे की वजह से भाजपा की स्थिति विधानसभा चुनावों के मुकाबले बेहतर रहने की संभावना है।
पिछली बार बीजेपी को लोकसभा की 4 सीटें मिली थीं और उसका वोट शेयर करीब 20% था। वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को 14% वोट मिले थे और वह 8 सीटें जीती थी।
इस स्थिति में अगर बीएसपी-बीआरएस गठबंधन काम कर गया तो कांग्रेस ज्यादा नुकसान और बीआरएस को अपने खोए हुए जनाधार को बढ़ाने का ज्यादा मौका मिल सकता है।












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