तेलंगाना HC ने दिया निर्देश- पुनर्वास के लिए विधवाओं, विधुरों को अलग परिवारों के रूप में दी जाए मान्यता
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने विधरों और विधवाओं के भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत पुर्नवास को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने उक्त अधिनियम के तहत पुनर्वास और पुनर्वास के उद्देश्य से विधवाओं और विधुरों को अलग परिवारों के रूप में मान्यता देने का निर्देश दिया है। यह फैसला सिद्दीपेट जिले में थोगुट्टा और एतिगड्डा किस्तापुर गांव के गजवेल, वेमुलाघाट के निवासियों द्वारा दायर रिट याचिकाओं के एक समूह के जवाब में आया है।

बता दें याचिकाकर्ताओं में प्रमुख रूप से एक महिलाएं, विधवाएं और कुछ विधुर और तलाकशुदा लोगों ने अलग विस्थापित परिवारों को
व्यवहारिक किए जाने के अपने अधिकार का दावा करते हुए, सरकार द्वारा लाभों से इनकार किए जाने पर विरोध किया था।
2016 और 2019 के बीच कोमुरावेल्ली मल्लानसागर जलाशय के निर्माण के लिए लगभग 2,000 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण हुआ था जिसके बाद अपने अधिकार के लिए ये मामला कोर्ट पहुंचा जिसमें इसके अतिरिक्त, जनवरी 2018 में एक नई 11(1) अधिसूचना में आसन्न जलमग्नता के कारण गांवो में सभी घरों के अधिग्रहण की मांग की गई।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने हाई कोर्ट में तर्क दिया था कि साझा निवास या घर पर स्वामित्स किसका इस बात की परवाह किए बगैर एकल महिलाओं, विधवाओं और विधुरों और तलाकशुदा लोगों को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार के प्रावधानों के अनुसार विशिष्ट विस्थापित परिवारों के रूप में माना जाना चाहिए।
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