Telangana Elections: सहानुभूति वोट बटोरने के उम्मीद में कई कैंडिडेट, कितना होगा लाभ? जानिए
Telangana Elections: सारे राजनीतिक समीकरण जब फेल हो जाते हैं, तो पार्टी या फिर जातिगत समीकरण तलाशती है या फिर सहानुभूति वोटों की उम्मीद की जाती है। तेलंगाना में इस बार कई ऐसे उम्मीदवार हैं जो एक बार नहीं बल्कि दो या तीन बार असफल रहे हैं। वे अब वोटर्स को अपने पक्ष में करने के लिए सहानुभूति कार्ड (Sympathy Card) का सहारा लेने के प्रयास हैं। आइए जानते हैं के तेलंगाना में ऐसे कौन- कौन से उम्मीवार हैं, जो पिछली बार हार के बाद मतदाताओं से सहानुभूति वोट की उम्मीद में हैं...
आदी श्रीनिवास
वेमुलावाड़ा सीट से आदी श्रीनिवास अब तक तीन पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने 2009, 2014 और 2018 में यहां से किश्मत आजमाई थी। श्रीनिवास भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों से चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार वे फिर से मैदान में हैं और सहानुभूति वोट हासिल करने के प्रयास में हैं। आदी श्रीनिवास ने मौजूदा विधायक चौधरी रमेश बाबू को टक्कर देने लिए नामांकन दाखिल किया है। हालांकि वे अपनी नागरिकता को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। 2018 में, श्रीनिवास को 55,864 वोट मिले। लेकिन उन्हें बीआरएस उम्मीदवार रमेश बाबू के हाथों 28,186 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

मेदिपल्ली सत्यम
मेदिपल्ली सत्यम को 2014 में टीडीपी के टिकट पर और 2018 में कांग्रेस ने चोप्पाडांडी सीट से मैदान में उतारा। लेकिन सफलता नहीं मिली। अब वे सहानुभूति वोटों की उम्मीद में हैं। 2018 में उन्हें 48,963 वोट मिले। लेकिन वे 4,127 मतों से हार गए थे।
अदलुरी लक्ष्मण कुमार
धर्मपुरी में तीन बार वोटों के मामूली अंतर से हार का सामना करने वाले अदलुरी लक्ष्मण कुमार फिर से मैदान में हैं। वे पिछले चुनाव में 441 वोटों के मामूली अंतर से हार गए थे।
बंदी संजय और लिंगला कमल राजू
वर्ष 2009, 2014 और 2018 में बीआरएस उम्मीदवार लिंगला कमल राजू ने मधिरा सीट से कांग्रेस नेता मल्लू भट्टी विक्रमार्क के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वहीं करीमनगर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार बंदी संजय को 2014 और 2018 में हार का सामना करना पड़ा लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए।
पी विजया रेड्डी, केके महेंद्र रेड्डी
खैरताबाद में पी जनार्दन रेड्डी की बेटी पी विजया रेड्डी अपने पिता का नाम लेकर और सहानुभूति कार्ड खेलकर मतदाताओं से अपील कर रही हैं। इससे पहले उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वहीं सिरसिला में कांग्रेस उम्मीदवार केके महेंद्र रेड्डी का मुकाबला बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव से है। महेंदर रेड्डी 2009 में मात्र 171 वोटों से हार गए थे और मतदाताओं से एक मौका देने की अपील कर रहे हैं।
पायल शंकर
आदिलाबाद से भाजपा उम्मीदवार पायल शंकर को इससे पहले विधानसभा चुनावों में दो बार हार का सामना करना पड़ा। पायल शंकर 2009 से अब तक तीन बार चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन सफलता एक भी बार नहीं मिली। वे इस बार फिर से चुनावी मैदान में हैं और सहानुभूति वोटों की उम्मीद में हैं।
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