तेलंगाना चुनाव से पहले कर्नाटक के किसानों ने कांग्रेस के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा?
तेलंगाना विधानसभा चुनावों को कांग्रेस कर्नाटक में आजमाए हुए मॉडल के दम पर जीतना चाहती है। उसने तेलंगाना के वोटरों से जो 6 गारंटियों का वादा किया है, कुछ ओपनियन पोल के हिसाब से उसने काम भी किया है और उसे अपने पक्ष में हवा बनाने का मौका भी मिल रहा है।
लेकिन, लगता है कि उसी कर्नाटक मॉडल को अब कांग्रेस के खिलाफ तेलंगाना में हथियार बनाया जा रहा है। क्योंकि, कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों से काफी संख्या में किसान तेलंगाना आ गए हैं और कांग्रेस के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

तेलंगाना में कांग्रेस के खिलाफ कर्नाटक के किसानों का अभियान
कर्नाटक से तेलंगाना आए ये किसान अभी सिर्फ प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में ही कांग्रेस के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कर्नाटक चुनावों के दौरान कांग्रेस की ओर से जो गारंटियां दी गई थीं, उसे सिद्दारमैया सरकार लागू नहीं कर पा रही है।
यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब बहुत ही मुश्किल चुनाव लड़ रहे सत्ताधारी बीआरएस के नेता और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव कांग्रेस की गारंटियों को खोखला बताने में लगे हैं और कह रहे हैं कि चुनाव जीतने के बाद वह इसे लागू नहीं करेगी।
कांग्रेस बीआरएस पर लगा रही है आरोप, पार्टी ने किया इनकार
कर्नाटक से किसानों का जो शुरुआती जत्था वहां की कांग्रेस सरकार की 'पोल' खोलने के लिए तेलंगाना आया हुआ है, उसने अपने अभियान की शुरुआत कोडंगल विधानसभा से की है, जहां कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी चुनाव लड़ने वाले हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कर्नाटक के किसानों को बीआरएस ने बुलाया है। जबकि बीआरएस नेताओं का दावा है कि कर्नाटक के किसानों के प्रदर्शन से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
कई प्रमुख विधानसभा क्षेत्र में अभियान चलाने की योजना
वैसे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कर्नाटक के किसान इसी तरह की रैलियां परिगी, तंदूर और नारायणपेट जैसे विधानसभा सीटों पर भी करने की योजना बना रहे हैं। कर्नाटक के किसानों का इस तरह का इसी हफ्ते से शुरू हुआ है। वह बसों में भरकर तेलंगाना पहुंचे और कोडंगल के वंकटेश्वर स्वामी मंदिर से अंबेडकर मूर्ति तक मार्च किया।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
इनमें से ज्यातर किसान कर्नाटक कलबुर्गी जिले के गांवों के बताए जा रहे हैं। जब पुलिस ने उनसे कहा कि अपने गांवों की ओर लौट जाएं तो वे अपने हाथों ली हुई तख्तियां दिखाने लगे। इन तख्तियों में लिखा था कि कांग्रेस ने कर्नाटक में जो वादे किए थे, उसे पूरा नहीं किया गया है। इसी तरह का प्रदर्शन गडवाल में भी किया गया है, जिसमें कर्नाटक कल्याण रायथु संघम के लोग शामिल थे।
किसान लगा रहे हैं कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप
इन प्रदर्शनकारियों में शामिल कर्नाटक के कनागड्डा के एक किसान के रामुलु ने टीओआई को बताया कि 'कांग्रेस कृषि क्षेत्र को सिर्फ 3 से 5 घंटे बिजली दे रही है। इसी तरह से अन्न भाग्य योजना के तहत प्रति परिवार 10 किलो चावल देने का वादा किया गया था, जबकि सिर्फ 5 किलो राशन दिया जा रहा है....'
स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कर्नाटक के किसानों के इन समूहों का विरोध भी किया है और पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं कि उन्हें तेलंगाना में रैली करने की अनुमति कैसे दी जा रही है। लेकिन, किसानों का कहना है कि कांग्रेस के खिलाफ उनका प्रदर्शन जारी रहेगा, क्योंकि वह अपने वादे निभाने में नाकाम रही है।
कांग्रेस की बढ़ सकती है मुश्किल
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और सत्ताधारी बीआरएस के बीच ही लग रहा है। बीजेपी इसे त्रिकोणीय बनाने की पूरजोर कोशिश में है। कांग्रेस की 6 गारंटियों वाले वादे का ही असर है कि सीएम केसीआर की पार्टी को भी उसकी काट में कई लोक-लुभावन वादे करने पड़े हैं। लेकिन, ऐसी स्थिति में अगर कर्नाटक के लोग तेलंगाना आकर कांग्रेस के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेंगे तो पार्टी के लिए मतदाताओं को 6 गारंटियों का भरोसा दिलाना आसान नहीं होगा।












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