Telangana Election: केसीआर ने प्रशांत किशोर से मांगी मदद, खुफिया रिपोर्ट के बाद बीआरएस में खलबली-सूत्र
तेलंगाना विधानसभा चुनावों के लिए मतदान में अब सिर्फ 9 दिन बाकी रह गए हैं। लेकिन, इस दौरान सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति को लेकर एक बड़ी ही सनसनीखेज खबर आई है।
सूत्रों ने बताया है कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोमवार शाम को करीब तीन घंटे तक बीआरएस के नेता और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और उनके बेटे और कैबिनेट मंत्री केटी रामा राव से मुलाकात की है।

सोमवार को 3 घंटे तक केसीआर-केटीआर से मिले पीके-सूत्र
जानकारी के मुताबिक यह मुलाकात खुफिया रिपोर्ट में बीआरएस के लिए मुश्किल चुनावी भविष्यवाणी के बाद हुई है। सूत्रों ने बताया है कि पीके ने सोमवार को शाम के 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक दोनों नेताओं के साथ उनके आवास पर चुनावी रणनीतियों को लेकर बात की है।
खुफिया रिपोर्ट में बीआरएस की मुश्किल दिखने के बाद मुलाकात-रिपोर्ट
कहा जा रहा है कि जब सीएम केसीआर को खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद हैट्रिक लगाने की संभावना धूमिल होती दिखने लगी तो उन्होंने चुनाव अभियान के बाकी बचे दिनों के लिए प्रशांत किशोर से मदद मांगी है, ताकि चुनाव तैयारियों को और भी पुख्ता किया जा सके।
कई राजनीतिक दलों के लिए काम कर चुके हैं प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर फिलहाल बिहार में अपनी एक जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वह पहले कई दलों के लिए चुनावी रणनीतियां बना चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने प्रधानममंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी काम किया था। जबकि, 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वह शिवसेना के लिए भी काम कर चुके हैं।
यही नहीं, वह पहले बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी, 2017 के विधानसभा चुनावों में पंजाब में कांग्रेस और पिछली बार आंध्र प्रदेश में वाईएस जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के लिए भी चुनावी रणनीतियां तैयार कर चुके हैं।
तेलंगाना में 30 नवंबर को वोटिंग
तेलंगाना विधानसभा चुनावों के लिए 30 नवंबर को सभी 119 सीटों के लिए वोटिंग होनी है, जिसमें कांग्रेस और बीआरएस के बीच कांटे की टक्कर चल रही है। यूं तो बीआरएस अभी तक 75 से ज्यादा सीटें जीतने के दावे कर रही थी, लेकिन लगता है कि फिलहाल उसे अपनी राह में रुकावटें नजर आ रही हैं।
वैसे करीब एक-तिहाई सीटों पर बीजेपी की दमदार मौजूदगी की वजह से त्रिकोणीय मुकाबले की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। खासकर ग्रेटर हैदराबाद के इलाके में भारतीय जनता पार्टी का अपना जनाधार कायम हुआ है। वहीं मैदान में बीएसपी और सीपीएम भी अपनी दावेदारी ठोक रही है।












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