मुझसे भारत के मुसलमान नहीं मौलवी चिढ़ते हैं: तारेक़ फतह
तारेक फतह ने कहा कि ये भारत के मुसलमान उन्हें नापसंद करते हैं, ऐसा कहना गलत है क्योंकि इसमें सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि उनसे सिर्फ मौलवी लोग चिढ़ते हैं।
पाकिस्तान में पैदा हुए कनाडा के लेखक और मुस्लिम कनेडियन कांग्रेस के संस्थापक तारेक फ़तह ने इस्लाम, मुसलमान और भारत पाकिस्तान से संबंधित कई मुद्दों पर बीबीसी से बात की है.
अपने बयानों के लिए चर्चा में बने रहने वाले तारेक़ फ़तेह ने बीबीसी से फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने कहा कि इस्लाम की बुनियादी मक़सद अल्लाह को एक मानना है. पैगंबर मुहम्मद के साथ जो लोग सबसे पहले आए उनका मकसद तौहीद था, यानी इंसान को अल्लाह के सिवाय किसी के सामने सर नहीं झुकाना चाहिए.
बीबीसी से फेसबुक लाइव का वीडियो देखें यहां .
वो बातें जो तारेक़ फ़तेह ने कहीं -
पैगंबर मोहम्मद की मौत के बाद जो फसाद शुरु हुए थे वो आज तक चल रहे हैं. उनकी मौत के बाद 18 घंटे तक उनका शव पड़ा रहा किसी ने उन्हें दफ़नाया नहीं. मुस्लिम शायद ये नहीं जानते हैं या फिर जानना नहीं चाहते कि हमारी आज की मुसीबतें उसी दिन से शुरू हुईं. ये तय हो गया कि जो कुरैशी हैं वो ख़लीफ़ा बन सकते हैं और अंसार जो हैं वो सिर्फ कुरैशी की खिदमत कर सकते हैं. शिया-सुन्नी तो कभी मसला था ही नहीं. अंसार बहुसंख्यक थे उन्होंने अपना नेता चुन लिया. जो मक्का-मदीना में रहने वाले अल्पसंख्यक थे. उन्होंने शोर मचाया था कि जो कुरैश नहीं है वो ख़लीफा नहीं हो सकता. इस्लाम का ये संदेश कि हर कोई बराबर है वो उसी दिन ख़त्म हो गया था. दोगलापन हमारी पहचान बन गई है. इतिहास में लिखी बातें हम जानना नहीं चाहते और कोई सवाल करता है तो घुमा फिरा कर जवाब देते हैं.
विवादों के क़िले फ़तह करने वाले तारेक़












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