Lok Sabha Election: बीजेपी ने कोयंबटूर से अन्नामलाई को क्यों बनाया उम्मीदवार? काफी गहरा है नाता
K Annamalai BJP Candidate from Coimbatore Tamil Nadu: तमिलनाडु में बीजेपी ने कोयंबटूर लोकसभा सीट से अपने युवा और तेज-तर्रार प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई को टिकट दिया है। आज बीजेपी के लिए तमिलनाडु में अन्नामलाई जितने ही खास हैं, वैसे ही कोयंबटूर सीट से भी उसका गहरा और काफी पुराना नाता है।
इंजीनियर से आईपीएस अधिकारी बने के अन्नामलाई ने बहुत ही कम समय में दक्षिण भारत में भाजपा के लिए एक मुश्किल राज्य में भी आज मुख्यधारा की राजनीति में ला खड़ा किया है। जबकि, कोयंबटूर सीट तमिलनाडु में भाजपा को करीब ढाई दशक पहले ही खड़े होने का आधार दे चुका है।

बीजेपी का कोयंबटूर से गहरा और पुराना नाता
कोयंबटूर सीट बीजेपी के लिए क्यों अहम है, इसका एक उदाहरण ये है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में कोयंबटूर दक्षिण सीट से बीजेपी की वनथी श्रीनिवासन चुनाव जीती थीं। मतलब, लेफ्ट के गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में भाजपा का पहले से ही जनाधार मौजूद है।
कोयंबटूर में दो-दो बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी है बीजेपी
अगर पुराने इतिहास में जाएं तो भाजपा कोयंबटूर से दो-दो बार लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर चुकी है।1998 में बीजेपी के सीपी राधाकृष्णन को इस सीट पर 55.85% वोट मिले थे। एक साल बाद ही 1999 के लोकसभा चुनाव में अपने खिलाफ संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर सीपीआई उम्मीदवार होते हुए भी उन्होंने 49.21% वोट लाकर अपनी सीट सुरक्षित रखी थी।
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने इस बार यहां पर अपने सहयोगी लेफ्ट की जगह अपना ही प्रत्याशी उतारा है। वह 1996 के बाद यहां कभी नहीं जीती है। डीएमके ने इस बार अन्नाद्रमुक से आए कोयंबटूर के पूर्व मेयर गणपति राजकुमार को टिकट दिया है। पिछली बार यह सीट सीपीएम ने भाजपा उम्मीदवार राधाकृष्णन को ही हराकर जीती थी।
आडवाणी पर हुए आतंकी हमले ने कोयंबटूर में भाजपा का बढ़ाया जनाधार
1998 में कोयंबटूर में हुए एक आतंकी हमले में देश के तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। इस आतंकी घटना को मुस्लिम आतंकी संगठन अल-उम्मा ने बाबरी ढांचा तोड़े जाने के खिलाफ अंजाम दिया था। इसी के बाद हुए चुनावों में यहां भाजपा के पक्ष में जबर्दस्त माहौल तैयार हुआ और पार्टी को दो-दो बार जीत का मौका भी मिला।
प्रवासी मजदूरों की वजह से भी बीजेपी के लिए बेहतर है ये सीट
कोयंबटूर बीजेपी के लिए चुनावी दृष्टिकोण से इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां टेक्सटाइल उद्योग की वजह से बड़ी तादाद में प्रवासी मजदूर रहते हैं। भाजपा को इनमें बहुत बड़ा वोट बैंक नजर आता है।
तमिलनाडु में करीब 40% वोट बैंक पर है भाजपा की नजर
दरअसल, जबसे कर्नाटक कैडर के युवा पुलिस अधिकारी ने 2019 में इस्तीफा देकर महज 37 साल की उम्र से इस राज्य में पार्टी की बागडोर संभाली है, वह द्रविड़ और तमिल राष्ट्रवाद की राजनीति में सिमटे इस प्रदेश में भाजपा के लिए एक नया जनाधार तैयार करने का अभियान चला रखा है।
तमिल राजनीति को समझने वाले जानकारों की मानें तो तमिलनाडु पर सिर्फ डीएमके और एआईएडीएमके वाली द्रविड़ विचारधारा ने दबदबा बना रखा है। जबकि, इनके अलावा भी एक 40% अलग वोट बैंक है, जो अबतक नेता की ही तलाश में रहा है। बीजेपी को अन्नामलाई में इसी वोटबैंक को अपनी ओर खींचने की प्रतिभा नजर आ रही है।
गुरुवार को उन्होंने राज्य में बीजेपी की अगुवाई में बन रहे गठबंधन को लेकर कहा है, 'तमिलनाडु में हमने गठबंधन और सभी 39 सीटों पर बंटवारे पर बातचीत पूरी कर ली है। तमिलनाडु 39 में से 39 सीटें नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (एनडीए) को देगा।'












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