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Tahawwur Rana पर भारत का कितना खर्च? क्या बनेगा नया 'कसाब पर्चा' या ₹50 की सीधी सजा?

Tahawwur Rana Extradition: करीब 17 साल की मशक्कत और लंबी कूटनीतिक लड़ाई के बाद आखिरकार ताहववुर हुसैन राणा (Tahawwur Hussain Rana) भारत आ चुका है। 26/11 के मास्टरमाइंड को अमेरिका से भारत लाना सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक बड़ा ग्लोबल मैसेज भी था कि अब भारत अपने दुश्मनों को कहीं भी छोड़ने वाला नहीं।

गुरुवार, 10 अप्रैल 2025 को राणा का विमान दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर करीब शाम 6:15 PM पर उतरा, लेकिन अब देश में ये चर्चा गर्म है कि इस पर कितना खर्च होगा? क्या फिर से कसाब जैसा मामला दोहराया जाएगा?

Tahawwur Rana Extradition

कसाब केस से तुलना क्यों हो रही है?

अगर आपको याद हो तो, 2008 के मुंबई हमले (Mumbai Attack) में दोषी अजमल कसाब को पकड़ने और उसकी सुरक्षा में भारत सरकार ने करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए थे। सिर्फ ITBP की सुरक्षा व्यवस्था पर ही लगभग 26 करोड़ रुपये खर्च हुए। मुंबई की आर्थर रोड जेल में उसके लिए एक खास बुलेटप्रूफ सेल बनाई गई थी, जिस पर 5 करोड़ से ज्यादा का खर्च आया।

मेडिकल, खाना, सुरक्षा बलों की सैलरी और बाकी व्यवस्थाओं को मिलाकर सरकार ने कुल मिलाकर करोड़ों झोंक दिए। लेकिन जब फांसी का समय आया तो... कानून के मुताबिक कसाब की फांसी पर सिर्फ 50 रुपये का खर्च आया। जी हां, भारतीय कानून के तहत किसी अपराधी को फांसी देने के लिए सिर्फ ₹50 का बजट तय है।

एक नजर में पूरा ब्यौरा

  • ₹26 करोड़ ITBP की सुरक्षा पर
  • ₹3.47 करोड़ खाने, दवा, कपड़ों और बुलेटप्रूफ सेल पर
  • ₹19.28 करोड़ ITBP के जवानों पर
  • ₹1.22 करोड़ महाराष्ट्र पुलिस की सुरक्षा टीम के वेतन पर
  • कुल मिलाकर, कसाब पर हर दिन करीब ₹2 से ₹3.5 लाख का खर्च आता था।

Tahawwur Hussain Rana Cost: क्या राणा पर भी आएगा इतना खर्च?

तहव्वुर राणा भी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का आरोपी है, जो अमेरिका में पूर्व में दोषी साबित हो चुका है। उसे भारत में हाई-प्रोफाइल, हाई-सिक्योरिटी 'अंडा सेल' में रखा जाना तय माना जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन ये तय है कि उसकी सुरक्षा, मेडिकल, जेल इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी प्रक्रिया पर काफी खर्च आएगा।

Tahawwur Hussain Rana Fast Track Punishment: क्या राणा को मिलेगी फास्ट ट्रैक सजा?

अब एक और बड़ा सवाल है - क्या तहव्वुर राणा पर केस तेजी से चलेगा या वह भी सालों तक जेल में रहेगा? सरकार इस बार फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए ट्रायल का विकल्प देख सकती है। जनता और पीड़ित परिवारों की अपेक्षा है कि सजा में देरी न हो। अगर केस लटकता है, तो फिर से करोड़ों खर्च होने की आशंका है।

क्या ये सिर्फ खर्च का सवाल है?

नहीं, ये सिर्फ आर्थिक बोझ का मुद्दा नहीं है। ये राष्ट्रीय अस्मिता, न्याय और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसे का सवाल भी है। अगर राणा पर तेज, निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई होती है, तो यह भारत की न्यायिक शक्ति और वैश्विक स्तर पर मजबूत छवि को और आगे बढ़ाएगा।

अब क्या उम्मीद की जाए?

तहव्वुर राणा की पूछताछ NIA और अन्य एजेंसियां मिलकर करेंगी। उसे 26/11 हमले की पूरी साजिश में शामिल होने के साक्ष्य दिखाए जाएंगे। न्याय प्रक्रिया को समयबद्ध रखने की मांग तेज़ होगी।

तहव्वुर राणा की भारत वापसी महज एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि भारत की कानूनी और कूटनीतिक ताकत की पहचान है। अब सबकी निगाह इस पर टिकी है कि क्या इस बार खर्च और देरी से परे जाकर सीधा और ठोस इंसाफ मिलेगा? या फिर एक और 'कसाब पर्चा' तैयार होगा? देश यही चाहता है - न्याय मिले, दिखे और समय पर पूरा हो।

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