सामने आई सुशांत सिंह राजपूत की फॉरेंसिक विसरा रिपोर्ट, जानिए क्‍या कहा गया है इसमें

मुंबई। एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत को एक महीने से ज्‍यादा का वक्‍त हो गया है लेकिन अभी तक लोग हैरान है कि आखिर उन्‍होंने ऐसा क्‍यों किया। हर कोई उनकी खुदकुशी के पीछे की वजह जानना चाहता है। इस बीच सुशांत सिंह राजपूत की फॉरेंसिक विसरा रिपोर्ट आ गई है। सोमवार सुबह कलीना फोरेंसिक लैब की ओर से बांद्रा पुलिस को यह रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें किसी तरह के संदेह (फाउल प्ले) से इनकार किया गया है। लैब की ओर से बताया गया है कि इसी मामले में 'स्टमक वाश' और नाखूनों के सैम्पल की रिपोर्ट आनी बाकी है। आपको बता दें कि इससे पहले भी सुशांत की एक विसरा रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें किसी भी तरह का कोई संदेह नहीं था।

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    Sushant Singh Rajput की Viscera Report में खुलासा, शरीर में नहीं था जहर | वनइंडिया हिंदी
    फाइनल पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट में हुआ था खुलासा

    फाइनल पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट में हुआ था खुलासा

    आपको बता दें कि 25 जून को सुशांत सिंह राजपूत की फाइनल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई थी। 5 डॉक्टर्स की टीम ने इस रिपोर्ट को तैयार किया था। इस रिपोर्ट में भी कहा गया कि सुशांत की मौत फांसी लगाने के बाद दम घुटने से हुई है। आपको बता दें कि सुशांत ने 14 जून 2020 को बांद्रा स्थित अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत ने सभी को झकझोर दिया था। मुंबई पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और अब तक कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है।

    नाखूनों की रिपोर्ट से यह होगा स्पष्ट

    नाखूनों की रिपोर्ट से यह होगा स्पष्ट

    नाखूनों की फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह साफ होगा कि मरने से पहले सुशांत का किसी के साथ कोई हाथापाई हुई थी या नहीं। हालांकि पुलिस सुशांत सिंह की मौत की वजहों की अलग-अलग एंगल से जांच कर रही है। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले में उनकी सह-कलाकार संजना सांघी ने अपना बयान दर्ज कराया है। संजना सांघी ने अभिनेता सुशांत सिंह के साथ 'दिल बेचेरा' में अभिनय किया है।

    क्‍या होता है विसरा रिपोर्ट

    क्‍या होता है विसरा रिपोर्ट

    किसी व्यक्ति की मौत के बाद मौत के कारणों को पता लगाने के लिए मृतक के शरीर के कुछ आंतरिक अंगों को सुरक्षित रखा जाता है, इसे विसरा कहते हैं। बिसरा का रासायनिक परीक्षण करने के बाद मौत की वजह स्पष्ट हो जाती है। विसरा सैम्पल की जांच फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री में होती है। साफ शब्‍दों में कहें तो किसी व्यक्ति का शव देखने पर उसकी मृत्यु संदिग्ध लगे या उसे जहर देने की आशंका जताई जा रही हो तो उस व्यक्ति का विसरा सुरक्षित रख लिया जाता है। बाद में जांच के बाद स्थिति का पता लगाया जाता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो मानव शरीर के अंदरुनी अंगों फेफड़ा, किडनी, आंत को विसरा कहा जाता है।" विसरा को तीन शीशे के जारों में सुरक्षित रखा जाता है, एक में जितने भी पाचन तंत्र हैं उन्हें रखते हैं, दूसरे में ब्रेन, किडनी, लीवर और तीसरे में ब्लड को रखा जाता है। देश में प्वाइजनिंग इंफार्मेशन सेंटर बहुत कम हैं, जहां यह डाटा बनाया जा सके की देश में कितने लोग जहर खाने से मर रहे हैं। यूपी में तो एक भी ऐसा सेंटर नहीं है। मेडिकल कॉलेज में भी फॉरेंसिक साइंस लैब नहीं होता है, जहां यह पता लगाया जा सके कि व्यक्ति की मौत किन कारणों से हुई है। जिस वजह से यह पता लगा मुश्किल होता कि कितनी मात्रा में किस जहर से व्यक्ति की मौत हुई है।

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