सुप्रीम कोर्ट: नए रोस्टर पर किन बड़े मामलों की होगी सुनवाई
आठ सप्ताह की गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार को भारत का सुप्रीम कोर्ट फिर से अहम केसों की सुनवाई करने जा रहा है.
इन मामलों में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद, सबरीमला मंदिर में सभी आयु की महिलाओं के प्रवेश के फ़ैसले पर पुनर्विचार जैसे बड़े मामले शामिल हैं.
इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' वाले नारे और रफ़ाल लड़ाकू विमान के फ़ैसले पर पुनर्विचार जैसे मामलों पर भी सुनवाई होनी है.
दिलचस्प बात यह है कि इस बार सुप्रीम कोर्ट में पूरे 31 जज होंगे. इनमें हाल में नियुक्त हुए दो जज भी शामिल होंगे. सीट न भरी होने के कारण कई बार आलोचक न्यायपालिका पर सवाल खड़े करते रहे हैं कि वह कई मामलों की सुनवाई नहीं कर पाती है.
नया रोस्टर सिस्टम
चार सालों में ये पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट में पूरे 31 जज होंगे. कोई भी पद खाली नहीं होगा. साथ ही एक जुलाई 2019 से सुप्रीम कोर्ट का नया रोस्टर भी लागू होने जा रहा है.
नए रोस्टर सिस्टम के मुताबिक पीआईएल यानी जनहित याचिकाओं से जुड़े मामलों को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एसए बोबड़े, एनवी रमन्ना, अरुण मिश्रा और आर एफ. नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठें सुनेगीं.
पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा के कार्यकाल में सारी जनहित याचिकाएं वही सुनते थे.

ये ध्यान देने वाली बात है कि नए रोस्टर सिस्टम के तहत जस्टिस बोबड़े, रमन्ना, मिश्रा और नरीमन सीजेआई द्वारा कही गई जनहित याचिकाओं की सुनवाई करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के नए रोस्टर सिस्टम के मुताबिक चुनाव से जुड़े मामलों, जिन्हें पहले सिर्फ मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच सुनती थी, उन्हें अब जस्टिस बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच से बांटा जाएगा.
अब दो और जज सुप्रीम कोर्ट की बेचों की अध्यक्षता करेंगे. इनमें जस्टिस एम एम शांतानागौदर और एस अब्दुल नज़ीर शामिल हैं.
नए रोस्टर सिस्टम के मुताबिक सीजेआई की बेंच अब सामाजिक न्याय, चुनावों, कंपनी कानून, मोनोपोली और प्रतिबंधित व्यापार प्रेक्टिसेस, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई), सिक्यूरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), बीमा और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से जुड़े मामलों पर दी गई याचिकाओं की सुनवाई भी करेगी.
इसके अलावा मुख्य न्यायाधीश मध्यस्थता, हैबियस कॉरपस, आपराधिक मामलों, न्यायालय की अवमानना और सामान्य सिविल मामलों को भी सुनेगी.
सीजेआई संवैधानिक पदाधिकारियों की नियुक्ति, वैधानिक नियुक्तियां और अन्य विधि अधिकारियों की नियुक्तियों से जुड़े मामलों की सुनवाई भी करेंगे.
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामला
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामला सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामला है. इस मामले की अंतिम सुनवाई के समय सर्वोच्च न्यायालय ने अधिक समय देते हुए मध्यस्थों के पैनल से कहा था कि वह 15 अगस्त तक आपसी सहमति से मामले को सुलझाएं.
सुनवाई के अंतिम दिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस अहम मुद्दे को सौहार्दपूर्ण तरीक़े से सुलझाने के लिए उससे पैनल के प्रमुख जस्टिस (रिटायर्ड) एफ़एमआई कलिफ़ुल्ला ने 15 अगस्त तक का समय मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ के अध्यक्ष मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मध्यस्थता करने वाले पैनल की याचिका को स्वीकार करते हुए 15 अगस्त तक का समय दे दिया था.
राहुल गांधी ने चुनावी रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर 'चौकीदार चोर है' का नारा दिया था. इस नारे को मानहानि मानते हुए बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के ख़िलाफ़ केस किया था. इस मामले पर भी अंतिम सुनवाई होगी.
- बाबरी मस्जिद विवाद में अब कोर्ट ने क्या कहा?
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मई के पहले हफ्ते में हुई सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने अपने इस बयान पर बिना किसी शर्त माफी मांग ली थी.
लेकिन याचिकाकर्ता मीनाक्षी लेखी ने उनकी माफी को ख़ारिज कर दिया था और सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उनके ख़िलाफ़ कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट कई रिव्यू पिटीशन पर भी सुनवाई करेगा. इनमें पूर्व मंत्री अरुण शौरी, वरिष्ठ वकील यशवंत सिन्हा, प्रशांत भूषण और आप सांसद संजय सिंह की याचिका शामिल है.
इनकी याचिका में 14 दिसंबर 2019 के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई है, जिसमें फ्रांस से 36 रफाल लड़ाकू विमान खरीदने के सरकार के फ़ैसले को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को रद्द कर दिया गया था.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट लॉयर्स वॉइस की ओर से दायर की गई याचिका पर भी सुनवाई करेगा.
इस याचिका में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके वकील पति आनंद ग्रोवर के एनजीओ लॉयर्स कलेक्टिव की ओर से FCRA (फोरन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) के कथित उल्लंघन के मामले में चल रही जांच का स्टेटस बताने की मांग की गई है.
मामले की आखिरी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने लॉयर्स वॉइस के मुकुल सिंह की याचिका के आधार पर लॉयर्स कलेक्टिव और पति-पत्नी की जोड़ी को नोटिस जारी किया था.
सबरीमला मंदिर
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट केरल के चर्चित सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में दायर की गई समीक्षा याचिकाओं पर भी अपना फैसला सुनाएगा.
बीते 6 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
सर्वोच्च अदालत ने मामले में 54 समीक्षा याचिकाएं, पांच रिट पिटीशन और कुछ ट्रांसफर पिटीशन पर सुनवाई की थी.
लेकिन इन सभी याचिकाओं में मुख्य रूप से सबरीमला से जुड़े फैसले की समीक्षा करने की मांग की गई थी.
(वरिष्ठ लीगल पत्रकार सुचित्र मोहंती से मिले इनपुट पर आधारित)
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