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Sukhpal Singh Khaira को आठ साल पुराने केस में SC से बड़ी राहत, ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के केस में कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को बड़ी राहत दी है। 2015 में ट्रायल कोर्ट ने सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ स्मगलिंंग के मामले में समन जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने समन निरस्त कर दिया।

Sukhpal Singh Khaira

Sukhpal Singh Khaira पंजाब कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने खैरा को लगभग आठ साल पुराने मामले में बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के केस में कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को राहत देते हुए 2015 में ट्रायल कोर्ट की तरफ से जारी समन निरस्त कर दिया। सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ स्मगलिंंग के मामले में समन जारी किया था।

संविधान पीठ का बेहद अहम फैसला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2022 में इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रखा कि क्या निचली अदालत के पास अन्य आरोपियों के खिलाफ एक आपराधिक मामले का फैसला करने के बाद अतिरिक्त अभियुक्तों को समन करने की शक्ति है? शीर्ष अदालत में जस्टिस एसए नज़ीर (अब सेवानिवृत्त), जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं थीं।

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    खैरा हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर SC पहुंचे

    पंजाब विधानसभा में विपक्ष के तत्कालीन नेता सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ फाजिल्का की एक अदालत ने 2015 के ट्रांस-बॉर्डर नशा तस्करी के मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया गया था। हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।

    20 साल तक जेल की सजा!

    पहले से ही दोषी ठहराए गए लोगों को पुलिस ने 9 मार्च, 2015 को दो किलो हेरोइन, 24 सोने के बिस्कुट, एक देसी पिस्तौल, दो पाकिस्तानी सिम कार्ड और एक एसयूवी के साथ गिरफ्तार किया था। उन्हें 31 अक्टूबर 2017 को तीन से लेकर 20 साल तक की जेल की सजा सुनाई गई थी।

    पांच साल पहले निचली अदालत में क्या हुआ?

    दिलचस्प है कि कोर्ट में मादक पदार्थ मामले में जब 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी, उसी दौरान अभियोजन पक्ष ने खैरा समेत पांच अतिरिक्त आरोपियों को तलब करने के लिए अर्जी दाखिल की थी। 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने 2019 में इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजा था।

    किन सवालों पर आया SC का फैसला?

    देश की सबसे बड़ी अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 (अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने की शक्ति) के दायरे और दायरे पर कानून के तीन प्रश्न तैयार किए थे। पीठ ने जिन सवालों पर फैसला सुनाया इसमें तय किए गए तीन मुद्दे शामिल हैं कि क्या ट्रायल कोर्ट के पास सीआरपीसी की धारा 319 के तहत अतिरिक्त आरोपियों को समन करने की शक्ति है, जब अन्य सह-आरोपियों के संबंध में समन की घोषणा करने से पहले उसी तारीख को सजा का फैसला सुनाया जा चुका हो।

    निचली अदालतों को 'सुप्रीम नसीहत'

    मामले को संविधान पीठ के पास भेजते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि उसका विचार है कि सीआरपीसी की धारा 319 के तहत मिली शक्तियां असाधारण प्रकृति की हैं। जटिलताओं से बचने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए अभियुक्तों को तलब करते समय निचली अदालतों को सतर्क रहना चाहिए।

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