सुप्रीम कोर्ट की पुलिस अधिकारियों पर तल्ख टिप्पणी, कहा- सत्ता पक्ष के साथ गठजोड़ परेशान करने वाला
नई दिल्ली, अगस्त 26: पुलिस अफसरों की सत्ताधारी दलों के साथ गठजोड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से तल्ख टिप्णणी आई है। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि देश में यह परेशान करने वाला ट्रेंड है। पुलिस अफसर सत्ता में मौजूद राजनीतिक पार्टी का पक्ष लेते हैं और उनके विरोधियों के खिलाफ कार्यवाही करते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में पुलिस पर राजनीतिक रूप से प्रेरित जांच के आरोप लगे हैं।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, पुलिस अधिकारी जो सत्ता का दुरुपयोग करते हैं और राजनीतिक विरोधियों को परेशान करते हैं, वे सत्ता का दुरुपयोग करते हैं। बाद में विरोधी सत्ता में आते हैं तो पुलिस अफसरों पर कार्यवाही करते हैं । इस हालात के लिए पुलिस विभाग को ही जिम्मेदार ठहराना चाहिए, उनको कानून के शासन पर टिके रहना चाहिए। इसे रोकने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी छत्तीसगढ़ के निलंबित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरजिंदर पाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए आई है। 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी गुरजिंदर पाल सिंह ने अदालत से अनुरोध किया है कि उन पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और साजिश के आरोप में प्राथमिकी रद्द की जाए। उनका आरोप है कि राज्य की कांग्रेस सरकार उन्हें परेशान कर रही है क्योंकि उन्हें पिछले भाजपा नेतृत्व वाले प्रशासन के करीबी माना जाता था।
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गुरजिंदर पाल को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुलिस उन्हें चार हफ्ते तक राजद्रोह और आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार नहीं करेगी। बता दें कि, इस साल की शुरुआत में छापे के बाद आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक अवैध संपत्ति का आरोप लगाया गया था। दूसरी ओर, छतीसगढ़ सरकार कीओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि चार्जशीट पिछले हफ्ते दाखिल की गई है , वे दो महीने से अंडरग्राउंड हैं। वे(गुरजिंदर) वरिष्ठ पुलिस अफसर हैं फिर भी फरार हैं।












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