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Supreme Court ने HC के जज पर दिए लोकपाल के किस आदेश को बताया 'बेहद गंभीर',फौरन लगा दी रोक

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में एक हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज के खिलाफ लोकपाल में दर्ज की गई शिकायतों पर आधारित कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह मामला 'बेहद गंभीर और चिंताजनक है, क्योंकि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।

सु्प्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई,जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अभय एस ओका की बेंच ने केंद्र सरकार,लोकपाल के रजिस्ट्रार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर इसपर 18 मार्च तक जवाब मांगा है।

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Supreme Court: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर चिंता

इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से पेश होकर कहा कि हाई कोर्ट का कोई भी जज लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम,2013 के दायरे में नहीं आता। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, क्योंकि यह मामला न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़ा है।

Supreme Court: शिकायतकर्ता को गोपनीयता बरतने का निर्देश

सर्वोच्च अदालत ने शिकायतकर्ता को जज का नाम सार्वजनिक करने से रोकते हुए शिकायत को गोपनीय रखने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता की पहचान छुपाई जाए और उसे नोटिस उसके निवास स्थान पर भेजा जाए।

Supreme Court: क्या है पूरा मामला?

लोकपाल ने 27 जनवरी को हाई कोर्ट के एक मौजूदा अतिरिक्त जज के खिलाफ दो शिकायतों पर आदेश पारित किया था। शिकायतों में आरोप था कि संबंधित जज ने राज्य के एक अतिरिक्त जिला जज और हाई कोर्ट के एक अन्य जज को एक निजी कंपनी के पक्ष में फैसले के लिए प्रभावित किया। बताया गया कि वह कंपनी पहले उस जज के वकालत के दौरान उनकी मुवक्किल थी।

लोकपाल ने अपने आदेश में कहा था कि उच्च न्यायालय के जज लोकपाल अधिनियम के दायरे में आते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर स्पष्ट कानून बनाने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता,तब तक लोकपाल का आदेश निलंबित रहेगा।

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख 18 मार्च

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 18 मार्च को सुबह 10:30 बजे पेश होने का निर्देश दिया है और उनसे लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने कहा कि यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। (इनपुट-पीटीआई)

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