सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता डॉक्टर मामले में सुनवाई की शुरू, कहा-'स्वास्थ्य पेशेवरों को काम पर लौटने दें'
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के मामले की सुनवाई शुरू कर दी है। कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ इस मामले की सुनवाई की निगरानी कर रही है।
एम्स नागपुर के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट को घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर उत्पीड़न का सामना करने की जानकारी दी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर डॉक्टर काम नहीं करेंगे तो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं कैसे चलेंगी। इसने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से अपनी ड्यूटी पर लौटने का आग्रह किया और उन्हें आश्वासन दिया कि काम पर लौटने के बाद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हैं। घटना के विरोध में डॉक्टरों ने लगातार 14वें दिन भी काम का बहिष्कार किया। राज्य सरकार द्वारा केएमसीएच के तीन अधिकारियों का तबादला करने और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष की नियुक्ति रद्द करने के बावजूद आंदोलन जारी रहा।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में से एक ने पीटीआई को बताया कि हमारा आंदोलन जारी रहेगा। क्योंकि हमारी कुछ ही मांगें पूरी हुई हैं। हमारी बहन को न्याय दिलाने की मुख्य मांग अभी भी लंबित है। हम सुप्रीम कोर्ट में आज के घटनाक्रम का इंतजार करेंगे और उसके बाद कोई फैसला लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों पर निर्भर मरीजों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। इसने डॉक्टर संगठनों को आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय टास्क फोर्स द्वारा सभी हितधारकों की बात सुनी जाएगी। अदालत ने कोलकाता बलात्कार-हत्या मामले के संबंध में सीबीआई और पश्चिम बंगाल सरकार दोनों द्वारा दायर की गई स्थिति रिपोर्ट पर गौर किया।
स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की सुरक्षा और सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को एक राष्ट्रीय प्रोटोकॉल विकसित करने के लिए 10 सदस्यीय एनटीएफ का गठन किया गया। प्रशिक्षु डॉक्टर की मौत के बाद देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि डॉक्टरों की सुरक्षा एक राष्ट्रीय चिंता का विषय है।
आपको बता दें कि कोलकाता में एक ट्रेनी महिला डॉक्टर का शव 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मिला था। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। अदालत ने एफआईआर दर्ज करने में देरी करने और सरकारी सुविधा में तोड़फोड़ की अनुमति देने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की है।
कथित बलात्कार और हत्या की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी जांच स्थिति रिपोर्ट सौंप दी है। जूनियर डॉक्टरों की मांगों पर बुधवार रात अमल करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने केएमसीएच मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को हटा दिया।












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