24 साल पहले बेचा था मिलावटी दूध, अब सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई सजा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एक दूध वाले को 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है। उसने 24 साल पहले दूध में मिलावट करने का अपराध किया था। कोर्ट ने कहा कि बेशक अपराध छोटा था लेकिन आरोपी को दोषमुक्त नहीं किया जा सकता। कुमार को एक ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था और उसकी सजा को भी सेशंस कोर्ट और हाई कोर्ट ने बरकरार रखा।

नवंबर 1995 में एक सार्वजनिक विश्लेषक द्वारा परीक्षण के बाद पता चला कि राज कुमार द्वारा बेचे गए दूध में 4.6% दूध फैट और 7.7% मिल्क सॉलिड नॉन-फैट (एमएसएनएफ) पाया गया, जो कि खाद्य अपमिश्रण निरोधक कानून के तहत 8.5% होना चाहिए था।
कुमार के वकीलों ने उनकी सजा को चुनौती दी और कहा कि नमूने का विश्लेषण करने में देरी हुई है और इसलिए इस कमी को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उनके वकील ने यह भी कहा कि मवेशियों को दिए गए भोजन और गाय के स्वास्थ्य के कारण ऐसा हो सकता है। कुमार के वकील ने उदारता दिखाने के लिए भी कहा क्योंकि मामला 24 साल पुराना है।
कोर्ट ने कहा कि दूध में किसी भी तरह की मिलावट करना अपराध है। क्योंकि ये ना केवल व्यस्क बल्कि बच्चों की सेहत को भी प्रभावित करता है। इसलिए दोषी को कम से कम छह माह की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस शामिल थे, ने अपील के दौरान उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया और कहा कि एक बार जब विधायिका द्वारा मानक तय किए जाते हैं तो उन मानकों का पालन करना होता है। कोर्ट ने कहा कि बेशक मिलावटी दूध सेहत के लिए हानिकारक ना हो लेकिन उसे बेचे जाने में मानकों की अनदेखी की गई थी।
कोर्ट ने कहा कि मामले को बेशक अधिक समय हो गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सजा को कम कर दिया जाए। कुमार से आत्मसमर्पण कर सजा को पूरा करने के लिए कहा गया।












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