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कोरोना से मौत पर मुआवजे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, 3 दिन में केंद्र से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 19 जून: देश में कोरोना वायरस से हुई मौतों का मुआवजा, कोविड-19 डेथ सर्टिफिकेट मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 जून) को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई की और अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 3 दिन के भीतर केंद्र सरकार से इस मामले पर जवाव मांगा है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि देश में कोरोना से सभी मरने वाले लोगों को सरकार 4 लाख रुपये का मुआजवा नहीं दे सकती है। इसके पीछे का तर्क देते हुए केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि ये कोई बाढ़ और तूफान जैसी आपदा नहीं है कि सभी जान गंवाने वालों को मुआजवा दिया जाए।

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    Supreme Court

    सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिन में मांगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कोविड-19 डेथ सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया और गाइडलाइन्स आसान करने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी पूछा है कि क्या जो पहले कोविड डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे, वो मान्य हैं या फिर उनमें कोई बदलाव किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिनों में केंद्र सरकार से इस मामले पर लिखित में अपना जवाब देने को कहा है।

    याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दिया ये हवाला

    अवकाश पीठ के न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एमआर शाह ने इस मामले पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता रीपक कंसल और गौरव कुमार बंसल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वकील एस उपाध्याय ने कहा कि कोरोना से जान गंवाने वाले परिवारों की मदद करना सरकार का कर्तव्य और दायित्व है। हमारे देश के संविधान आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 12 में इस बात का उल्लेख भी है। ये एक मानवीय संकट है, जिसमें सरकार को लोगों की मदद करनी होगी।

    अधिवक्ता और याचिकाकर्ताओं में से एक गौरव बंसल ने सुप्रीम कोर्ट को कहा, ''केंद्र ने अपने हलफनामे में खुद कहा है कि ये महामारी एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है, ऐसे में सरकार को मुआवजा देना चाहिए। आप सोचिए, भारत एक गांवों का देश है। जहां पर आमतौर पर महिलाओं घरों में रहती हैं और घर के पुरुष बाहर काम करने जाते हैं, ऐसे में अगर पुरुष कोरोना से पीड़ित होते हैं और मौत हो जाती है तो परिवार गंभीर रूप से संकट में पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में उनकी मदद के लिए सरकार को आगे आना होगा। इसलिए मैं कोर्ट से अनुग्रह राशि देने की मांग करता हूं।''

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बोले-आपदा प्रबंधन कोरोना पर लागू किया गया है

    इस मामले पर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "आपदा प्रबंधन कोरोना महामारी पर लागू होता है। हमने कोविड महामारी से निपटने के लिए कई शक्तियों का प्रयोग भी किया है। वित्त आयोग ने राज्यों की मदद की है। सरकार ने कोरोना संक्रमित लोगों को ऑक्सीजन और दवा उपलब्ध कराए हैं। केंद्र सरकार के पास जो धन टैक्स के जरिए आता है, वह केंद्र सरकार के लिए एक पोर्टल फंड होता है लेकिन सरकार ने इसे राज्यों को जरूरतमंदों की मदद के लिए आवंटित किया है और किया जा रहा है।''

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    वित्तीय बाधाओं और अन्य कारकों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे दायर कर बताया था कि कोरोना के कारण मरने वालों के परिवार के सदस्यों को 4 लाख रुपये मुआवजा का भुगतान नहीं किया जा सकता है।

    English summary
    Supreme Court reserves its judgment on 4 lakhs to family of deceased who succumbed to COVID19
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