Kolkata Case: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार, कहा-'15 अक्टूबर तक पूरे करें सुरक्षा उपाय'
Kolkata Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार की चिकित्सा सुविधाओं में सुरक्षा उन्नयन की धीमी गति को लेकर कड़ी आलोचना की है। यह सुनवाई कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 31 वर्षीय डॉक्टर के साथ हुए दुखद बलात्कार और हत्या के मामले से संबंधित थी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले में सुरक्षा उपायों की धीमी प्रगति पर चिंता जताई। जिसमें सीसीटीवी कैमरे लगाना और शौचालयों एवं विश्राम क्षेत्रों का निर्माण शामिल था।
सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि 9 अगस्त से इन परियोजनाओं की निगरानी के बावजूद कोई भी काम 50 प्रतिशत से अधिक पूरा नहीं हुआ है। अदालत ने सुरक्षा उपायों को पूरा करने के लिए 15 अक्टूबर की अंतिम समय सीमा तय की और इस मामले की तात्कालिकता पर जोर दिया।

सुनवाई के दौरान सीबीआई ने डॉक्टर की हत्या और अस्पताल में वित्तीय गड़बड़ियों की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति की सूचना दी। कोर्ट ने पाया कि सीबीआई ने अहम सुरागों का पता लगाया है। जिससे आरजी कर मेडिकल कॉलेज में उन कर्मचारियों की जांच शुरू हुई जो वित्तीय कदाचार के आरोपों के बावजूद अभी भी कार्यरत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से इन जानकारियों को राज्य सरकार के साथ साझा करने का अनुरोध किया। ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
अदालत ने पीड़िता के परिवार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर उनकी पहचान और तस्वीरों के अनधिकृत वितरण के खिलाफ उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया। परिवार का प्रतिनिधित्व कर रही वकील वृंदा ग्रोवर ने इस बारे में अदालत के समक्ष व्यथा जताई कि इस तरह का बार-बार होना उनके दुख को और बढ़ा रहा है। यह पीड़ित परिवार के चल रहे संघर्ष की ओर भी इशारा करता है। जो न्याय की तलाश के बीच उत्पन्न हो रहा है।
राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों पर आरोप लगाया कि वे इनपेशेंट और आउटपेशेंट विभागों में अपनी जिम्मेदारियों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। हालांकि रेजिडेंट डॉक्टरों की वकील इंदिरा जयसिंह ने इसका कड़ा विरोध किया और अदालत को आश्वस्त किया कि सभी आवश्यक और आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से जारी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को राष्ट्रीय टास्क फोर्स की प्रगति पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। जो चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के भीतर अन्य व्यवस्थागत मुद्दों से संबंधित है। 14 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ होगी। जिससे भारत में चिकित्सा संस्थानों में कार्यस्थल सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर नई मिसाल कायम हो सकती है।
कोलकाता के डॉक्टर के दुखद मामले में सुप्रीम कोर्ट की भागीदारी ने चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा और जवाबदेही पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। सुरक्षा उपायों के अलावा कोर्ट का फोकस चिकित्सा समुदाय के भीतर प्रणालीगत चुनौतियों को भी हल करने पर है। 14 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से इस मामले में और भी अहम प्रगति की उम्मीद है। जो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।












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