'कीड़े-मकोड़े जैसा सनातन धर्म...' कहने वाले उदयनिधि स्टालिन को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, जानिए क्या-क्या कहा?
डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन को उनके 'सनातन धर्म' वाले बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है और उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन से कहा कि एक मंत्री होने के नाते अपने बयानों को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप एक मंत्री हैं, आपको अपने बयानों के अंजाम का एहसास होना चाहिए। उदयनिधि तमिलनाडु में डीएमके सरकार में मंत्री हैं। बीते साल सितंबर में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना कोरोनावायरस और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी।

याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने उदयनिधि से कहा, 'तब आपने 19(1) ए और 25 के तहत अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया था, अब आप अनुच्छेद 32 के अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि आप जानते हैं कि आपने क्या कहा है? आपको उसके परिणामों का एहसास होना चाहिए था, आप एक मंत्री हैं कोई आम आदमी नहीं।'
सुप्रीम कोर्ट द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने 'सनातन धर्म' के बारे में कथित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग की है।
स्टालिन की तरफ से कोर्ट में पेश हुए एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वह बयान को उचित नहीं बता रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर डाला कि स्टालिन के खिलाफ 6 राज्यों में एफआरआई दर्ज हैं और वे सिर्फ उन एफआरआई को क्लब करने की अपील कर रहे हैं।
एडवोकेट सिंघवी ने एफआईआर को एक साथ जोड़ने की दलील देने के लिए पूर्व में अन्य मामलों जैसे कि अर्नब गोस्वामी, नूपुर शर्मा, मोहम्मद जुबैर आदि के केस में दिए गए फैसलों का हवाला दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट को सुझाव दिया कि स्टालिन इसके लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
इस पर उदयनिधि के एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर उन्हें कई हाई कोर्ट जाना पड़ा तो वे बंध जाएंगे। उन्हें 6 राज्यों में जाना पड़ेगा और यह अभियोजन से पहले ही एक उत्पीड़न होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कि वे अगले हफ्ते इस मामले पर सुनवाई करेंगे।
क्या था मामला?
पिछले साल 2 सितंबर को उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, 'कुछ चीजों का सिर्फ विरोध नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें जड़ से खत्म किया जाना चाहिए। हम डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना वायरस का विरोध नहीं कर सकते। हमें इसे खत्म करना होगा। इसी तरह हमें सनातन को खत्म करना है।'
सनातन धर्म पर की गई इस टिप्पणी को लेकर पूरे देश में बवाल शुरू हो गया था। भाजपा सहित अन्य पार्टियों ने उनके बयान की तीखी आलोचना की थी।












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