सुप्रीम कोर्ट ने CEC नियुक्ति कानून पर रोक से किया इनकार, संवैधानिक वैधता पर सुनवाई स्थगित
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति से जुड़े नए कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला फिलहाल एक "अकादमिक बहस" जैसा प्रतीत होता है, ऐसे में इस पर अंतरिम रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।
लाइव हिंदुस्तान की खबर के अनुसार न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं की सुनवाई स्थगित कर दी। हालांकि पीठ ने संकेत दिया कि यदि न्यायिक सूची में स्थान मिला तो इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह की जा सकती है।

New CEC Appointment Law: सीजेआई को चयन समिति से हटाने पर आपत्ति
याचिकाओं में 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति से भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) को बाहर कर दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नया प्रावधान सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा मार्च 2023 में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करता है। उस निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI शामिल होंगे।
प्रशांत भूषण ने की जल्द सुनवाई की मांग
NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई बुधवार और गुरुवार को ही की जाए। उन्होंने कहा कि दो दिन में सुनवाई पूरी की जा सकती है।
इसके जवाब में पीठ ने बताया कि गुरुवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ आंशिक रूप से सुने गए मामलों की सुनवाई करेगी, और नियमित सुनवाई के लिए सीमित समय है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,
"हम चाहते हैं कि हम 24 घंटे काम करें, लेकिन हर दिन रात को 50 फाइलें पढ़ने के बाद हमारे अंदर कितनी ऊर्जा बचती है, यह भी देखना पड़ता है।"
राजनीतिक नेताओं की याचिकाएं भी शामिल
ADR के अलावा कांग्रेस नेता जया ठाकुर, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं ने भी इस कानून को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि सरकार ने CJI को चयन समिति से हटाकर लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर किया है।












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