नारदा स्टिंग केस: टीएमसी नेताओं के हाउस अरेस्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से CBI को झटका
नारदा स्टिंग केस: टीएमसी नेताओं के हाउस अरेस्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से CBI को झटका
नई दिल्ली, 25 मई: नारदा स्टिंग मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सीबीआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें फरहाद हाकिम, मदन मित्रा, सुब्रत मुखर्जी और शोवन चटर्जी को हाउस अरेस्ट में भेजने का आदेश दिया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट इस मामले को देख रहा है, ऐसे में हम इसमें दखल नहीं देंगे। सभी पक्ष वहीं अपनी बात रखें। जिसके बाद सीबीआई ने अपनी याचिका वापस ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि विशेष पीठ लिबर्टी की रक्षा के लिए नियुक्त की जाती है। यह पहली बार है कि स्वतंत्रता को छीनने का विशेष पीठ ने किया है।
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सुप्रीम कोर्ट मे जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस बी आर गवई की बेंच के सामने सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये आदेश कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि जब आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तो सीबीआई दफ्तर के बाहर जमा हो गई, मुख्यमंत्री धरने पर बैठ गईं। तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले को दूसरी जगह ट्रांसफर की मांग की। उन्होंने कहा कि इतना गंभीर मामला है कि इसे सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता है कि हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर तुषार मेहता से कहा कि आप पांच जजों की बेंच के सामने चल रही सुनवाई को वापस ले सकते हैं, लेकिन अगर हम इसे सुनेंगे तो हमे आदेश पारित करने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ही मामला सुनेगा।
नारद स्टिंग केस में कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा 21 मई को टीएमसी के चार नेताओं को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की बजाए हाउस अरेस्ट करने और मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।












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