Supreme Court: 'दोषी सांसदों के आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक सही नहीं', केंद्र सरकार ने दायर की हलफनामा
Supreme Court: सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले दिनों दोषी ठहराए गए जनप्रतिनिधियों के आजीवजन चुनाव लड़ने से रोक लगाने की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।
इ्स मामले पर अब केंद्र सरकार ने बुधवार (26 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट में एक काउंटर-हलफनामा दायर किया है।

केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध किया
लाइव लॉ की रिपोर्ट की मुताबिक केंद्र सरकार ने उन राजनेताओं पर चुनाव लड़ने के लिए आजीवन प्रतिबंध लगाने की याचिका का विरोध किया गया, जो आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए हैं। सरकार ने कहा कि, अयोग्यता की अवधि पूरी तरह से विधायी नीति के दायरे में आती है।
वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी याचिका
2016 में वकील अश्विनी उपाध्याय ने ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी।जिसमें 1951 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 और 9 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि, राजनैतिक दल स्वच्छ छवि वाले लोगों को क्यों नहीं ढूंढ पा रही है।
कानून तोड़ने वाले कानून कैसे बना सकते हैं- SC
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सरकार और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग से पूछा कि, अगर कोई सरकारी कर्मचारी दोषी ठहराया जाता है तो वह जीवन भर के लिए सेवा से बाहर हो जाता है, फिर दोषी राजनेता संसद या विधानसभा में कैसे लौट सकता है? कानून तोड़ने वाले कानून बनाने का काम कैसे कर सकते हैं।
इस वक्त क्या है कानून?
इस वक्त मौजूद कानून के तहत कोई भी जनप्रतिनिधि को अगर 2 साल या उससे ज्यादा समय के लिए सजा होती है तो उसे सजा पूरे करने के बाद 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक रहता है। उसके बाद वे चुनाव लड़ सकते हैं।
याचिकाकर्ता ने इन मुद्दों को उठाया था
वहीं याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने मांग की थी कि दोषी जनप्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव लड़ने से रोक लगाया जाए। वहीं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को निपटाने में तेजी लाया जाय।
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