Trump China Visit: ट्रंप-जिनपिंग की दोस्ती से बदला दुनिया का नक्शा! भारत के लिए खतरे की घंटी कैसे?

Trump China Visit: चीन की राजधानी बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाकात ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस दौरान दोनों नेताओं ने न केवल एक-दूसरे की जमकर तारीफ की, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प भी लिया।

ट्रंप द्वारा शी जिनपिंग को 'महान नेता' कहना और उनके साथ दोस्ती को सम्मान बताना, वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। इस मेल-मिलाप के बाद अब दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत की कूटनीतिक चिंताओं का बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

Trump China Visit

महाशक्तियों का नया गठजोड़ और भारत

भारत के लिए अब तक अमेरिका एक मजबूत रणनीतिक साझेदार रहा है, खासकर चीन को संतुलित करने के मामले में। लेकिन अगर ट्रंप और जिनपिंग के बीच गहरी दोस्ती हो जाती है, तो चीन पर लगाम कसने के लिए भारत की जो अहमियत थी, वह कम हो सकती है। अमेरिका का चीन की ओर झुकाव भारत को कूटनीतिक रूप से अकेला कर सकता है, जिससे सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर भारत को मिलने वाला अमेरिकी समर्थन कमजोर पड़ने की आशंका है।

एशिया में चीन का बढ़ता दबदबा

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तालमेल पूरे एशिया के शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकता है। अब तक दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में अमेरिका, चीन की मनमानी को चुनौती देता रहा है। यदि ट्रंप प्रशासन चीन के प्रति नरम रुख अपनाता है, तो चीन इस क्षेत्र के छोटे देशों और भारत पर अपना दबाव बढ़ा सकता है। एशिया में 'सुपरपावर' बनने की चीन की महात्वाकांक्षा अब बिना किसी बड़े विरोध के और तेजी से आगे बढ़ सकती है।

व्यापारिक समीकरण और आर्थिक झटका

ट्रंप अपने साथ अमेरिका के दिग्गज कारोबारियों को चीन ले गए हैं, जिसका सीधा मतलब है कि दोनों देश बड़े आर्थिक सौदे करने वाले हैं। भारत खुद को 'चीन के विकल्प' के तौर पर ग्लोबल सप्लाई चेन में स्थापित करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन अगर अमेरिका और चीन के व्यापारिक रिश्ते फिर से पटरी पर लौट आते हैं, तो विदेशी निवेश और बड़ी कंपनियों का रुख वापस चीन की ओर मुड़ सकता है, जिससे भारत के आर्थिक हितों को नुकसान होगा।

ये भी पढ़ें: Muslim NATO: पाकिस्तान बना रहा सुन्नी देशों का नेटो, भारत के लिए बड़ा खतरा! दोस्त बन सकते हैं कट्टर दुश्मन?

पाकिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

चीन हमेशा से पाकिस्तान का सबसे करीबी सहयोगी रहा है। यदि अमेरिका भी चीन के साथ अपनी ट्यूनिंग बेहतर कर लेता है, तो पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का थोड़ा बहुत जो भी सख्त रुख है वह नरम पड़ सकता है। भारत के लिए यह सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चिंता है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ पहले से ही सिरदर्द बना हुआ है। अमेरिका की 'मौन सहमति' मिलने पर इस क्षेत्र में आतंकवाद और विस्तारवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई और कठिन हो सकती है।

ये भी पढ़ें: न फोन करेंगे चार्ज- न फ्री WiFi करेंगे यूज, किस डर की वजह से Trump के अधिकारियों पर China में लगी पाबंदी?

कूटनीतिक रणनीति बदलने की जरूरत

ट्रंप और जिनपिंग की इस जुगलबंदी ने दिल्ली के नीति निर्माताओं को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। भारत को अब यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल 'हित' स्थाई होते हैं। अमेरिका पर अपनी निर्भरता की समीक्षा करते हुए भारत को रूस, यूरोप और अन्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को और अधिक स्वतंत्र और मजबूत बनाना होगा ताकि किसी भी बड़े वैश्विक बदलाव का उस पर बुरा असर न पड़े।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+