क्रिप्टोकरेंसी पर आरबीआई के प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने हटाने से किया इंकार
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आभासी मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) पर भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी प्रतिबंध पर रोक से मंगलवार को इन्कार कर दिया। हालांकि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने वित्त मंत्रालय, विधि एंव न्याय मंत्रालय, आईटी मंत्रालय और आरबीआई को नोटिस जारी करते हुए जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए कहा है।

6 अप्रैल के आरबीआई के सर्कुलर के अनुसार, आरबीआई आभासी मुद्राओं से संबंधित सभी सेवाओं को प्रतिबंधित करती है। इसके साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी की खरीद या बिक्री, खातों में स्थानांतरण या धन की प्राप्ति सहित किसी भी प्रकार के लेन देन को प्रतिबंधित किया गया है।
इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा दायर याचिका में आरबीआई के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इसे मनमाना, अनुचित और असंवैधानिक बताया था। एसोसिएशन ने दलील दी है कि भारतीय रिजर्व बैंक के सर्कुलर ने सर्वोच्च बैंक द्वारा नियोजित सभी संस्थाओं को वर्चुअल मुद्राओं में काम करने वाले किसी भी व्यक्ति या व्यापार को सेवाएं प्रदान करने से रोक दिया है।
क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती। अमूमन रुपया, डॉलर, यूरो या अन्य मुद्राओं की तरह ही इस मुद्रा का संचालन किसी राज्य, देश, संस्था या सरकार द्वारा नहीं किया जाता। यह एक डिजिटल करेंसी होती है जिसके लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर इसका प्रयोग किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है।












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