CJI दीपक मिश्रा पर दोबारा केंद्र को जस्टिस जोसेफ का नाम भेजने का दबाव
नई दिल्ली: जस्टिस केएम जोसेफ के मुद्दे को लेकर विवाद अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर बुधवार को जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने सीजेआई दीपक मिश्रा से मुलाकात की। इस मीटिंग में जस्टिस जे चेलमेश्वर मौजूद नहीं थे। 2 मई की बैठक के बाद जस्टिस जोसेफ के मामले पर ये पहली मीटिंग थी। 2 मई को कोलेजियम की बैठक में जस्टिस जोसेफ के मामले पर कोई फैसला नहीं हो सका था और करीब 45 मिनट तक चली कोलेजियम की बैठक बेनतीजा रही थी।

हालांकि सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस चेलमेश्वर ने चिट्टी लिखकर जस्टिस जोसेफ के नाम को फिर से केंद्र को भेजने की बात की है और इस बात पर जोर दिया है कि कोलोजियम अपनी सिफारिश पर कायम रहते हुए जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को दोबारा केंद्र को भेजे। इसके पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया था।
कॉलेजियम में जस्टिस केएम जोसेफ के नाम पर सर्वसम्मति दिखाई दे रही है, इसलिए सीजेआई दीपक मिश्रा पर औपचारिक कॉलेजियम बैठक बुलाने का दबाव भी है। मौजूदा मानदंडों के अनुसार, कोलेजियम से पुनर्विचार प्राप्त होने पर केंद्र के पास कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। ये तब संभव है जब सीजेआई दीपक मिश्रा कॉलेजियम की औपचारिक बैठक बुलाते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बात की भी चर्चा है कि यदि सीजेआई अन्य नामों पर विचार करते है तब केंद्र सरकार फिर से नामों का चयन कर सकती है।
इसके पहले 26 अप्रैल को केंद्र सरकार की तरफ से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इंदु मल्होत्रा के नाम पर मुहर लगाई थी और जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश को पुनर्विचार करने के लिए वापस कॉलेजियम को भेज दिया था। जस्टिस जोसेफ उस पीठ के प्रमुख थे जिसने 2016 में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाने के मोदी सरकार के फैसले को खारिज किया था। जस्टिस केएम जोसेफ जुलाई, 2014 से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस हैं।












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