आरक्षण को लेकर 102वें संशोधन से जुड़े फैसला पर केंद्र की रिव्यू पिटिशन सुप्रीम कोर्ट में खारिज
नई दिल्ली, 1 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अदालत से 102वें संशोधन से जुड़े उसके 5 मई के फैसले पर फिर से विचार का अनुरोध किया गया था। पांच जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि हमने पुनर्विचार याचिका को देखा लेकिन इससे हमें नहीं लगा कि इसमें कुछ ऐसा है, जिससे फैसले की समीक्षा की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को 102वें संशोधन से संबंधित अपने फैसले में कहा था कि इस संसोधन के बाद राज्यों के पास सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) की पहचान करने का अधिकार नहीं है। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एस रविंदर भट की पीठ ने बहुमत से ये फैसला दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से दिए फैसले में कहा था कि 102वें संशोधन के बाद राज्यों के पास सामाजिक व शैक्षणिक तौर पर पिछड़ों की पहचान कर लिस्ट बनाने का अधिकार नहीं है। फैसले में कहा गया था कि किसी समुदाय को पिछड़े वर्ग की सूची में डालना या उससे बाहर करने के बाद अंतिम सूची पर फैसला राष्ट्रपति पर निर्भर करता है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर रिव्यू याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने जो भी आधार रिव्यू के लिए दिए है उनको पहले ही 5 मई के फैसले में डील किया जा चुका है। ऐसे में हमें पुनर्विचार याचिका पर विचार करने का कोई पर्याप्त आधार दिखाई नहीं देता।
इस फैसले से मराठा आरक्षण पर भी असर होगा। 5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मराठा रिजर्वेशन को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि महाराष्ट्र में मराठा कम्युनिटी को सरकारी नौकरी और एजुकेशनल संस्थान में दाखिले के लिए दिया गया रिजर्वेशन 50 फीसदी के लिमिट को पार करता है।












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