कानून मंत्री रिजिजू बोले- Supreme Court Collegium Alien, CJI चंद्रचूड़ ने कहा- कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं
Supreme Court Collegium का मुद्दा लगातार चर्चा में है। कानून मंत्री रिजिजू ने कहा, ये संविधान से अलग है। CJI चंद्रचूड़ ने कहा, लोकतंत्र में कोई भी संस्था पूर्ण नहीं, केवल कॉलेजियम पर उंगली क्यों उठाना ? Supreme Court
Supreme Court Collegium Law Minister Rijiju की नजरों में Alien यानी लीक से अलग हटकर है। जजों की नियुक्ति की प्रणाली कॉलेजियम पर कमेंट के बीच Chief Justice Chandrachud ने कहा है कि लोकतंत्र में कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं है, ऐसे में केवल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को प्वाइंट आउट करना ठीक बात नहीं। बता दें कि सीनियर जजों के पैनल को कॉलेजियम कहा जाता है, जिसकी सिफारिश पर जजों की नियुक्ति होती है।

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कॉलेजियम सिस्टम को संविधान से अलग (Alien) करार दिया। उन्होंने कहा कि संविधान सभी के लिए एक "धार्मिक दस्तावेज" है, खासकर सरकार के लिए। हालांकि, जजों की नियुक्ति की प्रणाली- कॉलेजियम पर कानून मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी नए विवाद को जन्म दे सकती है।
31 साल पहले सरकारें बनाती थीं जज !
शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के तंत्र पर एक 'हमला' करते हुए कानून मंत्री ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली संविधान के लिए "विदेशी" है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने विवेक से, एक अदालत के फैसले के माध्यम से कॉलेजियम बनाया, जबकि 1991 से पहले सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती थी।
कॉलेजियम एलियन, फैसले का देश कैसे समर्थन करेगा ?
कॉलेजियम पर कानून मंत्री की टिप्पणी पर एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक रिजिजू ने टाइम्स नाउ समिट में कहा कि भारत का संविधान सभी के लिए, विशेष रूप से सरकार के लिए एक "धार्मिक दस्तावेज" है। उन्होंने कहा, कोई भी चीज जो केवल अदालतों या कुछ न्यायाधीशों द्वारा लिए गए फैसले के कारण संविधान से अलग (Alien) है, ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इसके निर्णय का पूरा देश समर्थन करेगा ?
सरकार को मेहनत करनी पड़ती है
रिजिजू ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली हमारे संविधान से अलग है। उन्होंने सवाल किया, "आप मुझे बताएं कि कॉलेजियम प्रणाली किस प्रावधान के तहत निर्धारित की गई है।" कानून मंत्री रिजिजू ने स्पष्ट किया कि एक बार जब उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय का कॉलेजियम सिफारिश भेज देता है, तो सरकार को उचित परिश्रम (due diligence) करना पड़ता है।
जब तक बेहतर सिस्टम नहीं, कॉलजियम...
गौरतलब है कि अदालतों में लंबित मामलों की तुलना में जजों की संख्या और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की विभिन्न सिफारिशों पर फैसलों में देरी और जजों की नियुक्ति में सरकार पर लगने वाले 'मौन' रहने के आरोपों पर एक सवाल का जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा कि 1991 में तत्कालीन सरकार ने भी कॉलेजियम का सम्मान किया। वर्तमान शासन भी "कॉलेजियम प्रणाली का बहुत सम्मान करती है, जब तक जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम से बेहतर प्रणाली प्रतिस्थापित नहीं की जाती।"
संसद से पारित NJAC सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराया
कानून मंत्री ने साफ किया कि वह इस बहस में नहीं पड़ेंगे कि यह व्यवस्था कैसी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "इसके लिए एक बेहतर मंच या बेहतर स्थिति की आवश्यकता है।" संसद ने कॉलेजियम प्रणाली के बदले राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) लगभग सर्वसम्मति से पारित किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया।
कॉलेजियम का सम्मान करना पड़ेगा
रिजिजू ने कहा कि जब तक कॉलेजियम प्रणाली प्रचलित है, उन्हें प्रणाली का सम्मान करना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि अगर आप उम्मीद करते हैं कि उन्हें केवल न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने वाले नाम पर हस्ताक्षर करना चाहिए क्योंकि यह कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित है, तो सरकार की भूमिका क्या है ? उचित परिश्रम (due diligence) शब्द का क्या अर्थ है ?
सरकारों के पास फाइलें क्यों भेजते हैं ?
उन्होंने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली में खामियां हैं और "लोग आवाज उठा रहे हैं कि प्रणाली पारदर्शी नहीं है। इसके अलावा, कोई जवाबदेही भी नहीं है। कानून मंत्री ने जजों की नियुक्ति में देरी के आरोपों पर कहा कि किसी को यह नहीं कहना चाहिए कि सरकार फाइलों पर मौन बैठी है। बकौल रिजिजू, "फिर फाइलें सरकार को मत भेजें। आप खुद को नियुक्त करते हैं और आप शो चलाते हैं ... सिस्टम काम नहीं करता है। कार्यपालिका और न्यायपालिका को मिलकर काम करना होगा।"
हर जज सही नहीं, लेकिन...
कॉलेजियम प्रणाली को संविधान से अलग बताने से पहले रिजिजू ने कहा कि हर जज सही नहीं होता। उन्होंने कहा, "लेकिन हर फैसला दोष रहित और ठीक (correct and right) है क्योंकि यह एक न्यायिक फैसला है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कोई भी न्यायपालिका का अपमान नहीं कर सकता है और कोई भी अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकता है।"
CJI की दो टूक- 'कोई भी संस्था परिपूर्ण नहीं'
कानून मंत्री की इस टिप्पणी के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं है, ऐसे में केवल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की प्रणाली पर उंगली उठाना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित संविधान दिवस समारोह में सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, "संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था परिपूर्ण नहीं है। हम संविधान के मौजूदा ढांचे के भीतर काम करते हैं और हम संविधान को लागू करने वाले वफादार सैनिक हैं।"
अदालतों में कैसी व्यवस्था हो ? CJI से सुनिए
उन्होंने कहा कि केवल शीर्ष अदालत की कॉलेजियम प्रणाली में सुधार या न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि से यह सुनिश्चित नहीं होगा कि अच्छे और योग्य लोग अदालत में शामिल हों। सीजेआई ने दो टूक कहा, "अच्छे लोगों को न्यायपालिका में लाना सिर्फ कॉलेजियम में सुधार के बारे में नहीं है। सीजेआई ने कहा कि जजों के रूप में बेंच में शामिल होने वाले वकील अंतरात्मा की पुकार और जनता के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था ऐसी बनानी होग जिसमें न्यायाधीश का कार्यालय युवा वकीलों को आकर्षित करे।
चीफ जस्टिस का आह्वान- इतिहास के प्रति जागरुक बनें
CJI ने कहा कि 26 नवंबर, 1959 का दिन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह संविधान सभा ने संविधान को अंगीकार किया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया लगातार विकसित होने वाला कार्य है। उन्होंने कहा कि संविधान समय की नई सामाजिक वास्तविकताओं को पूरा करने के लिए लगातार विकसित हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान का काम इस बात पर निर्भर करता है कि जिला न्यायपालिका कैसे काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब हम संविधान का जश्न मनाते हैं तो हमें संविधान को अपनाने से पहले के इतिहास के बारे में जागरूक होना चाहिए।
वकीलों की ड्रेस पर क्या बोले CJI Chandrachud
सीजेआई ने कहा कि कानूनी पेशे को अपने औपनिवेशिक आधार को दूर करना चाहिए। भारत जैसे देश में जहां गर्मियों में जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्म लहरें चलती हैं। हमें विशेष रूप से गर्मियों में वकीलों के लिए सख्त ड्रेस कोड पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोशाक की सख्ती के कारण महिला वकीलों की नैतिक पहरेदारी नहीं होनी चाहिए।
कानून मंत्री ने कहा- आपस में लड़ना ठीक नहीं
इस कार्यक्रम में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि एक देश अपने नेताओं के दूरदर्शी मार्गदर्शन में प्रगति करता है। उन्होंने कहा, "अगर नेता कमजोर हो जाते हैं, तो देश कमजोर हो जाता है। अगर CJI कमजोर हो जाते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट कमजोर हो जाता है और अगर सुप्रीम कोर्ट कमजोर हो जाता है, तो न्यायपालिका कमजोर हो जाती है। मैं भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को बधाई देता हूं और जानता हूं कि उनके अधीन न्यायपालिका का उदय होगा।" रिजिजू ने कहा, उन्होंने कहा कि वह देश में बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता अछूती है। हम यहां इसकी रक्षा के लिए हैं। हम सब एक हैं। आपस में लड़ना ठीक नहीं है।"
स्थायी विधि आयोग पर जोर
इसी कार्यक्रम में भारत के सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी- अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि हमें यह देखने की जरूरत है कि समुदाय के विभिन्न वर्गों के लिए न्याय की क्या जरूरतें हैं ? उन्होंने कहा, हमारी अदालती प्रणाली, हमारे कानून बनाने और कानून में सुधार को मौलिक रूप से पुनर्गठित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हमारे पास एक स्थायी विधि आयोग हो जिसे सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले विशेषज्ञों की सहायता प्राप्त हो।












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