जमानत मिलने पर लगाए 'भैया इज बैक' के पोस्टर, सुप्रीम कोर्ट ने कैंंसिल की बेल, फिर जाएगा जेल
नई दिल्ली, 6 मई: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक छात्र नेता को हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द कर दी क्योंकि उसने रिहा होने के बाद 'भैया इज बैक' के पोस्टर लगाए थे। रेप आरोपी एबीवीपी नेता की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि जमानत का जश्न मनाते हुए जिस बेशर्मी के साथ भइया इज बैक के पोस्टर लगे और इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया वो आरोपी के बेशर्म निर्लज्ज आचरण को दिखाता है। ये शिकायतकर्ता के मन में एक डर पैदा करने वाला है, हमें लगता है कि आरोपी का जमानत पर बाहर रहना निष्पक्ष सुनवाई में बाधा बनेगा वो गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

आरोपी शुभांग गोटिया को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने एक सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि एक छात्र नेता जो कानून का अध्ययन कर रहा है, उसने जिस तरह का बर्ताव जमानत के बाद किया, उसे देखते हुए लगता है कि वो बेल की रियायत का हकदार नहीं है।
क्या है मामला
एबीवीपी नेता शुभांग गोटिया पर 2018 में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान एक लड़की के साथ रेप का आरोप है। पीड़ित छात्रा ने जून 2021 में जबलपुर के महिला थाने में शुभांग गोटिया के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया था। जिसमें शुभांग को गिरफ्तार किया गया। 2021 में ही जबलपुर हाईकोर्ट से शुभांग को जमानत मिल गई थी। जिसके बाद उसके लिए भैया इज बैक के पोस्टर शहर में लगाए गए थे।
लड़की के वकील ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में दलील थी कि जमानत आदेश रद्द किए जाने चहिएं क्योंकि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और रिहाई के बाद उसका आचरण भी आपत्तिजनक था। आरोपी की तस्वीरें लगे पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर किए गए, जिसमें उसका स्वागत किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर माना और जमानत रद्द कर दी।












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