Gyanvapi Mosque: अगले आदेश तक SC ने शिवलिंग की कार्बन डेंटिंग पर लगाई रोक, 12 को होगी अगली सुनवाई

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेंटिंग और वैज्ञानिक सर्वे के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

 Supreme Court

Gyanvapi Mosque: वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में मिले कथित शिवलिंग के कार्बन डेंटिंग का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था। जिसके खिलाफ मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग सहित वैज्ञानिक परीक्षण पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। शुक्रवार 19 मई को जारी किए अपने एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह रोक लगाई है। बता दें, इस केस में अगली सुनवाई 12 मई को होगी।

ज्ञानपामी मस्जिद में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने का आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया था, जिससे संरचना की उम्र निर्धारित की जा सके। जिसके शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस आदेश को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए गुरुवार को सुनवाई की मंजूरी दे दी थी। बता दें कि हाई कोर्ट ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कथित 'शिवलिंग' का 'वैज्ञानिक सर्वेक्षण' कराने का आदेश दिया था। कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक सर्वेक्षण से यह पता लगाया जा सकता था कि यह शिवलिंग कितना पुराना है।

हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हिंदू याचिकाकर्ताओं के वकील विष्णु जैन ने तर्क दिया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि संरचना को कोई नुकसान न हो।

एसजी ने कहा कि हमें यह भी पता लगाने की जरूरत है कि क्या कार्बन डेटिंग के बजाय कुछ अन्य वैज्ञानिक परीक्षण किए जा सकते हैं। वहीं, सीजेआई ने कहा कि हम एएनआई से रिपोर्ट बुलाने के खिलाफ नहीं हैं, सरकार को विचार करने दें कि विकल्प और मुद्दे क्या हैं।

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    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल कमिश्नर के सर्वे के बाद ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग जैसी आकृति मिली थी। हिंदू पक्ष ने इसे ही असली शिवलिंग बताया जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस फव्वारा बताया था। आगे की जांच के लिए पूरे इलाके को सील भी कर दिया गया था।

    पहले यह मामला वाराणसी जिला जज की अदालत में पहुंचा। इसके बाद हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने एएसआई से रिपोर्ट मांगी। जिसमें बताया गया था कि बिना शिवलिंग को नुकसान पहुंचाए पांच तरीकों से साइटिफिक सर्वे किया जा सकता है।

    इस पर 12 मई को हाईकोर्ट ने शिवलिंग का साइंटिफिक सर्वे कराने की मंजूरी देते हुए एएसआई को अपनी रिपोर्ट जिला जज की अदालत में 22 मई को रखने का आदेश दिया था।

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