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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किया सवाल- कहा-'किसी मुख्य चुनाव अधिकारी का कार्यकाल क्यों नहीं पूरा होता'

सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने केंद्र सरकार को मुख्य चुनाव अधिकारी के स्वतंत्रता के हनन और छोटे कार्यकाल के लिए खिंचाई है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि 1996 के बाद से ही किसी भी मुख्य चुनाव अधिकारी (CEC) को 6 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया है। साथ ही बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से CEC की स्वतंत्रता के लिए दिखावटी प्रेम दिखाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें मुख्य चुनाव आयुक्त की स्वतंत्रता और कार्यकाल को लेकर लगाई गई याचिका के दौरान कही।

supreme court

जस्टिस के.एम. संविधान पीठ के प्रमुख जोसेफ ने मंगलवार को कहा कि चुनाव आयुक्त का कार्यकाल बहुत छोटा होता है। यह शुरू से ही जाना जा रहा है। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से आयुक्त को स्वतंत्रता देने के नाम पर सिर्फ दिखावटी प्रेम दिखाया जाता है। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि पिछली यूपीए सरकार के दौरान केवल 8 वर्षों में छह मुख्य चुनाव आयुक्त बदले गए थे। वहीं, वर्तमान सरकार के 2015 से 2022 तक के कार्यकाल में ही 8 मुख्य चुनाव आयुक्त बदले जा चुके हैं। इस दौरान पांच जजों की बेंच का नेतृत्व कर रहे जस्टिस जोसेफ ने सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी को भी फटकार लगाई।

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि विशेष रूप से 2004 के बाद से ही लगातार सरकारों ने ऐसे लोगों को "चुना" है जिनकी सेवानिवृत्ति करीब थी। साथ ही सरकारों को यह भी पता था कि अगर इन्हें चुना जाएगा तो 6 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं हो पाएगा। बावजूद उनकी निुयक्ति की गई। आपको बता दें कि अधिनियम 1991 की धारा 4 में कहा गया है कि सीईसी यानि कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होगा। अगर किसी भी अधिकारी की सेवानिवृत्ति की उम्र हो जाती है तो उसे बिना कार्यकाल पूरा किए ही रिटायर कर दिया जाता है।

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को धारा 324 का प्रयोग करके महाभियोग लगाकर तभी हटाया जा सकता है, जब 6 का कार्यकाल पूरा करने दिया जाएगा। जब मुख्य चुनाव को अधिकारी को 118 और 160 दिन में ही हटा दिया जा रहा तो कहां से इस धारा का प्रयोग किया जाएगा? उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के लिए गर्व की बात पूर्ण कार्यकाल को पूरा करना होता है।

जस्टिस जोसेफ ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार को जवाब देने की जरूरत है कि इस मुद्दे में "कोई नियंत्रण और संतुलन" क्यों नहीं है। साथ ही इस दौरान उन्होंने चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति में श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में प्रचलित संवैधानिक ढांचे का भी उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने अटॉर्नी जनरल से सवाल करते हुए कहा कि क्या आप चाहते हैं कि हम अन्य देशों से पीछे रहे?

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