कोरोना से मौत का फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर मुआवजा लेने की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दी इजाजत
कोरोना से मौत का फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर मुआवजा लेने की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दी इजाजतकोरोना से मौत का फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर मुआवजा लेने का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- जांच कराओ
नई दिल्ली, 24 मार्च: कोरोना वायरस से मौत का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर मुआवजा मांगने के मामले की जां होगी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जांच की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कोरोना से मौत का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर अनुग्रह राशि के दावों की जांच करने की अनुमति देते हुए कहा है कि केंद्र चार राज्यों में 5 फीसदी दावों का सत्यापन कर सकता है। ये राज्य आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और केरल हैं, जिनमें कोविड से मौतों को लेकर मुआवजे के लिए क्लेम और मौतों के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर है।

सुप्रीम कोर्ट ने 28 मार्च, 2022 तक हुई मौतों पर मुआवजा क्लेम करने के के लिए 60 दिन की समय सीमा और भविष्य के दावेदारों के लिए 50,000 रुपएय की अनुग्रह राशि का दावा करने के लिए 90 दिन की समय सीमा निर्धारित की है।
केंद्र की ओर से कही गई है फर्जी दावे किए जाने की बात
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोरोना से होने वाली मौत के मामले में आश्रित परिजनों को मुआवजा देने में दिक्कत आ रही है क्योंकि कई लोग फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर मुआवजे का दावा कर रहा है। तुषार मेहता ने दाव किया था कु डॉक्टर अन्य कारणों से हुई मौत को भी कोरोना से हुई मौत बताते हुए नकली प्रमाणपत्र दे रहे हैं। इस पर पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोरोना से मौत के लिए 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि दिए जाने के हमारे आदेश का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर कुछ लोग दुरुपयोग कर रहे हैं, इस पर हम चिंतित है। सुप्रीम कोर्ट ने अब इसमें जांच की इजाजत दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं मुआवजा देने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड से हुई मौत के मामले में मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपए अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र और राज्य सरकार कोरोना से मरने वालों के परिजनों को 50 हजार रुपए मुआवजा देने के लिए तैयार हुई थीं।












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