कर्नाटक में 4 फीसदी मुस्लिम कोटा खत्म करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हुई सुप्रीम कोर्ट
कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले बोम्मई सरकार ने मुसलमानों को दिया जाने वाला 4 प्रतिशत कोटा खत्म कर दी है। इस फैसले के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है।

Muslim quota in Karnataka: कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 के पहले मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की भाजपा सरकार ने मुसलमानों को दिए जाने वाले 4 प्रतिशत आरक्षण को समाप्त करने का फैसला सुनाया था। अब गुरुवार को बोम्मई सरकार के इस फैसले को चुनौदी देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के सुप्रीम कोर्ट ने हामी भर दी है।

राज्य में मुस्लिमों के लिए चार फीसदी आरक्षण खत्म करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सहमत हो गई है।
बता दें कर्नाटक सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के लिए दो नई श्रेणियों की घोषणा की और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत कोटा समाप्त कर दिया। मुसलमानों को अब तक दिया जाने वाले चार प्रतिशत ओबीसी मुस्लिम कोटा को वोक्कालिगा और लिंगायत के बीच बांटा गया है। राज्य सरकार के फैसले ने आरक्षण की सीमा को अब लगभग 57 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुसलमानों को कोटा के लिए पात्र मुसलमानों को अब ईडब्सूएस यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के तहत वर्गीकृत किया गया है।
वहीं मुसलमानों को दिए जाने वाले आरक्षण संबंधी इस याचिका के बारे में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ ने ध्यान दिया। सिब्बल की दलीलों पर ध्यान दिया और उन्होंने बताया कि याचिका के सभी दोषों को दूर कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मैंने कल तीन अदालत में इस याचिका का उल्लेख किया। यह चार फीसदी आरक्षण रद्द किए जाने के खिलाफ है।
जब सीजेआई ने कहा लेकिन दोष याचिका में को ठीक नहीं किया गया था इस पर जवाब देते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि सभी खामियां दूर कर ली गई हैं।जिसके बाद न्यायाधीशों की बेंच ने कहा ठीक है, हम इस याचिका को सूचीबद्ध करेंगे।'












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