भीषण गर्मी से इंसान ही नहीं भगवान भी परेशान! मंदिरों में AC-कूलर की व्यवस्था,मूर्तियों को पहनाए गए सूती वस्त्र
Summer: देशभर में गर्मी का सितम जारी है। उत्तर भारत में खासकर एक बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी की चपेट में है। इंसान तो इंसान भगवान भी इस गर्मी की मार से अछूते नहीं रहे हैं।
कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री के पार जा चुका है। 21 मई को हरियाणा का सिरसा 47.8 डिग्री के साथ सबसे गर्म क्षेत्र रहा, जबकी राजस्थान का पिलानी 47.2 डिग्री और पंजाब का भटिंडा 46.6 डिग्री के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहा।

दिल्ली में भी तापमान में वृद्धि देखी गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को दिल्ली और इसके आसपास के राज्यों में अगले पांच दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
उत्तर प्रदेश की वाराणसी में भगवान के लिए एसी-कूलर की व्यवस्था की गई है। भगवान के पहनने के लिए आम दिनों वाले भारी-भरकम कपड़ों को हटाकर सूती कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
काशी के मंदिरों में लगवाए गए एसी-कूलर
दरअसल, वाराणसी में गर्मी का सितम चरम पर है। क्षेत्र का तापमान 44 डिग्री के पर पहुंच गया है। भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए वाराणसी मंदिर प्रशासन ने काशी के मंदिरों में एसी और कूलर लगवाए हैं। इसके साथ ही गर्मी से भगवान को राहत देने के लिए सूती कपड़े भी पहनाए गए हैं।
वाराणसी के लोहटिया के राम जानकी मंदिर के पुजारी का कहना है कि भीषण गर्मी ने इस बार अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी से बचाव के लिए मंदिर में भगवान के लिए कूलर की व्यवस्था करनी पड़ी है। भगवान को गर्मी ना लगे इसलिए उन्हें सूती कपड़े पहनाए गए हैं। साथ-ही-साथ प्रसाद में मौसमी फल भी चढ़ाए जा रहे हैं।
भगवान को पहनाए जा रहे सूती वस्त्र
इसके अलावा वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध बड़ा गणेश मंदिर के पुजारी का कहना है कि बेकाबू गर्मी से हर कोई परेशान है। इसके कारण भगवान गणेश के लिए एयर कंडीशनर (AC) लगवाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा नहीं है कि भगवान को गर्मी परेशान करती है, फिर भी प्रतीकात्मक रूप से हर साल भीषण गर्मी के दौरान ऐसा किया जाता है। भगवान गणेश को सूती वस्त्र पहनाए जा रहे हैं।
सर्दियों में भी की जाती है खास व्यवस्था
बता दें, ऐसा लगभग हर साल ही किया जाता है। अत्यधिक गर्मी या सर्दी पड़ने पर भगवान के लिए मौसम के अनुरूप हीटर-कूलर और कपड़ों की व्यवस्था की जाती है। साथ ही भगवान को चढ़ने वाले प्रासाद में भी मौसम का विशेष धयान रखा जाता है।












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