Success Story: नाइट वाचमैन से लेकर IIM के प्रोफेसर तक का कठिन सफर, जानें कौन हैं रंजीत रामचंद्रन
कोच्चि, अप्रैल 12: केरल के 28 साल के रंजीत रामचंद्रन की सफलता उन सभी लोगों के लिए एक जीता जागता उदाहरण है, जो कम संसाधनों में अच्छा करने की ठान ले तो फिर मुश्किल से मुश्किल राह भी आसान लगने लगती है। रामचंद्रन की सफलता उन लोगों को अपने जीवन में विपरीत परिस्थितियों से लड़ने के लिए प्रेरित करती है, जो हार मानकर बैठ जाते हैं। रंजीत रामचंद्रन के लिए रात में चौकीदारी करने से लेकर आईआईटी कॉलेज में पढ़ाई और अब आईआईएम, रांची में असिस्टटेंट प्रोफेसर तक का सफर आसान नहीं रहा।
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रामचंद्रन की सक्सेस स्टोरी वायरल
रंजीत रामचंद्रन ने यह एक बार फिर से साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई बाधा नहीं होता है। कुछ साल पहले नाइट वॉचमैन के रूप में काम करने वाला शख्स अब IIM में प्रोफेसर बन गया है। प्रोफेसर का कच्चा घर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रामचंद्रन की सक्सेस स्टोरी आज सोशल मीडिया पर जमकर घूम रही है। उनके संघर्ष की कहानी और लोगों की जिंदगी में भी नया हौसला भरने का काम कर सकती है।

कच्ची झोपड़ी की फोटो शेयर कर कही ये बात
रामचंद्रन ने फेसबुक पर एक पोस्ट अपलोड किया जिसमें उन्होंने अपने घर की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, मैं इस घर में पैदा हुआ, बड़ा हुआ और अब भी यहीं रहता हूं। मुझे खुशी है यह बताते हुए इस घर में IIM Assistant Professor का जन्म हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने बारिश के पानी को रोकने के लिए तिरपाल की चादर से ढकी जीर्ण शीर्ण झोपड़ी की तस्वीर भी शेयर की, जिसे बाद उनकी पोस्ट फेसबुक देखते ही देखते वायरल हो गया और 37,000 से अधिक लाइक्स मिले। उनके प्रयासों की प्रशंसा करते हुए केरल के वित्त मंत्री टी एम थॉमस ने भी रामचंद्रन को फेसबुक पर बधाई दी।
क्लिक करे पढ़ें रामचंद्रन का पूरा फेसबुक पोस्ट

टेलीफोन एक्सचेंज में करते थे चौकीदारी
रामचंद्रन कासरगोड जिले के पनाथुर में एक बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज में रात के चौकीदार के रूप में काम कर रहे थे, जबकि उन्होंने जिले के पियस एक्सथ कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री हासिल की। उन्होंने 9 अप्रैल को एक फेसबुक पोस्ट के अपनी कहानी सबके सामने रखी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। रंजीत ने अपने फेसबुक पोस्ट में गरीबी के साथ-साथ अपने कॉलेज और नौकरी के संघर्ष के बारे में बताया। उन्होंने लिखा कि मैंने दिन के दौरान कॉलेज में पढ़ाई की और रात में टेलीफोन एक्सचेंज में काम किया।

पिता टेलर और मां मनरेगा मजदूर
जानकारी के मुताबिक उनके पिता, मां और दो भाई-बहन कुल पांच लोगों का परिवार है। उनके पिता एक दर्जी हैं और उनकी मां मनरेगा के तहत एक दिहाड़ी मजदूर हैं। इस स्तर तक पहुंचने के लिए रंजीत ने बहुत मेहनत की है। रामचंद्रन ने अपने पोस्ट में बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। इस दौरान उन्होंने बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज के लिए नाइट चौकीदार का काम किया, जिसका 4,000 रुपए वेतन मिलता था। यह देखने की जिम्मेदारी उनकी है कि टेलीफोन एक्सचेंज में बिजली बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस नौकरी को करते हुए अपनी हाई एजुकेशन पूरी की।

रंजीत शुरू से ही पढ़ाई में थे तेज
रंजीत शुरू से ही पढ़ाई में तेज रहे हैं। वह अनुसूचित जनजाति से हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई में मिले हर मौके का पूरा फायदा उठाया। रंजीत ने राजापुरम के पायस टेंट कॉलेज में बीए अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम में एडमिशन लिया। फिर उन्होंने कासरगोड में केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीजी किया। पीजी पूरा होने तक नाइट वॉचमैन की नौकरी की। पीजी ने इसके बाद आईआईटी-मद्रास में पीएचडी पूरी की। रंजीत ने बैंगलोर के क्राइस्ट कॉलेज में दो महीने तक सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया। हाल ही में एक भर्ती के दौरान रांची IIM में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए चुने गए।












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