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Hannah Simon: वो नेत्रहीन लड़की, जो 500 में 496 नंबर लाकर विशेष कैटेगरी में टॉपर बनी, जानिए उसकी कहानी

Story Of Visually challenged girl from Kerala, Who topped CBSE Class XII in category of students with disabilities

कोच्चि। हन्ना एलिस साइमन... यह वो नाम है जो आज इंटरनेट पर चर्चा में है। यह नाम केरल के कोच्चि की रहने वाली एक 'नेत्रहीन' लड़की का है, जिसने सीबीएसई से विकलांग विद्यार्थियों की श्रेणी में 12वीं कक्षा में टॉप किया है। हन्ना 500 के स्‍कोर में से 496 मार्क्स लेकर आई है। विद्यार्थी होने के साथ-साथ वह एक यूट्यूबर, सिंगर और मोटिवेशनल स्‍पीकर भी है। 12वीं के बाद उसकी सफलता की एक और कहानी अब दिव्‍यांगों को प्रेरित करेगी।

केरल की दिव्‍यांग छात्रा हन्ना एलिस साइमन

केरल की दिव्‍यांग छात्रा हन्ना एलिस साइमन

यहां हम आपको हन्ना एलिस साइमन (Hannah Alice Simon) के बारे में बता रहे हैं। उन्‍होंने खुद मीडिया के समक्ष टॉपर बनने की खुशी जाहिर की। हन्‍ना ने कहा कि, 'माता-पिता ने मुझे 'फिजिकली चैलेंज्‍ड' होने की पीड़ा नहीं झेलने दी। उन्‍होंने मुझे विकलांग विद्यार्थियों वाले विशेष स्कूल से एक सामान्य स्कूल में शिफ्ट कराने की सोचने के बजाय, मुझे शुरू से ही एक सामान्य स्कूल में पढ़ाना बेहतर समझा। मेरे सामने यूं तो कई चुनौतियां थीं। मगर..अपने बूते मैं यहां तक पहुंची। खुश हूं, और ईश्‍वर की आभारी भी हूं।'

19 साल उम्र, दोनों आंखें खराब, फिर भी बुलंदी पर

19 साल उम्र, दोनों आंखें खराब, फिर भी बुलंदी पर

हन्ना कक्कानाड के राजगिरी क्रिस्तु जयंती पब्लिक स्कूल से पढ़ी हैं। दोनों आंखें खराब होने के बावजूद उनके कक्षा 12 में 500 में से 496 अंक आएं हैं। वह ह्यूमैनिटीज की छात्रा हैं। उनकी उम्र 19 वर्ष है। हन्ना बचपन से ही सामान्य स्कूल में पढ़ती आईं हैं।

  • हन्ना ने लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज से वेस्टर्न क्लीसिकल, रॉक और पॉप संगीत में कक्षा 8वीं तक की शिक्षा हासिल की है।

वह कहती हैं,

'मेरे जन्‍म के समय से ही मुझे माइक्रोफथाल्मिया (ऐसा जन्म-दोष, जिससे अंधापन आया) था। माइक्रोफथाल्मिया के कारण कारण मुझे चीजें सामान्य बच्चों की तरह नहीं दिखती थीं।'

वह कहती हैं कि उनके सामने जिंदगी में बहुत सारी चुनौतियां आने वाली हैं, लेकिन वह इन सबके लिए अपनी छोटी सी उम्र में ही तैयार हो गईं।

स्कूल के बच्चे उड़ाते थे मजाक

स्कूल के बच्चे उड़ाते थे मजाक

हन्ना ने अपने स्‍कूल के दिनों के बारे में बताया, 'मेरा स्‍कूल में दाखिला कराया गया था तो वहां बहुत से बच्चे मिले। उन्होंने कहा, "चौथी कक्षा तक मैं दूसरे स्कूल में थी और मुझे वहां कई शरारती बच्चों का सामना करना पड़ा। वे मुझे बुरे नाम से बुलाते थे, मुझे भूत और शैतान कहते थे। वो कहते थे कि मैं उन्हें डराती हूं। फिर मैंने पांचवीं कक्षा में अपना स्कूल बदल लिया।"
बकौल हन्ना एलिस साइमन, "जब मैं छोटी थी तब मुझे धमकाया जाता था और दूसरे छात्र मुझे दूर रखते थे। लेकिन मुझे पता था कि मुझे अपने जीवन में इन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, इसलिए मुझे बचपन से ही यह सब झेलना आ गया। मुझे इससे जीवन की बड़ी चुनौतियों का सामना करने की शक्ति भी मिली।"

मैं ज्यादातर लोगों के लिए हमेशा अलग थी

मैं ज्यादातर लोगों के लिए हमेशा अलग थी

हन्ना ने कहा, "जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई, अन्य छात्रों की बदमाशियां कोई बड़ी समस्या नहीं रहीं। फिर छात्र मुझे धमकाते नहीं थे, लेकिन ज्यादा बात-चीत भी नहीं करते थे। कई दफा टीचर मुझ पर अलग से ध्यान देने की कोशिश करते थे। लेकिन उनका ज्यादा ध्यान भी मुझे उत्पीड़न जैसा महसूस होता था। मैं ज्यादातर लोगों के लिए हमेशा अलग थी।"

8 गाने लिख चुकीं, हजारों सब्सक्राइबर्स

8 गाने लिख चुकीं, हजारों सब्सक्राइबर्स

हन्‍ना को गाने का शौक है। यूट्यूब पर उनके वीडियो आते रहते हैं। उन्होंने अब तक 8 गाने लिखे हैं और उनके यूट्यूब चैनल पर करीब 20,000 सब्सक्राइबर्स हैं। वे शॉर्ट स्टोरीज की किताबें भी लिख कर चुकी हैं। भविष्य में वह क्रिएटिव लेखन और संगीत के अलावा साइकोलॉजी के फील्‍ड में अपना करियर बनाना चाहती हैं।

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