Statue of Unity के अनावरण के दौरान पीएम मोदी ने कहीं ये 10 बड़ी बातें
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' का उद्घाटन किया। सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा को स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के नाम से जाना जाएगा। इस प्रतिमा को गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया में स्थापित किया गया है। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के अनावरण के मौके पर पीएम मोदी ने कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का ये स्मारक उनके प्रति करोड़ों भारतीयों के सम्मान, हमारे सामर्थ्य, का प्रतीक तो है ही, ये देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान होने वाला है। इससे हजारों आदिवासी बहन-भाइयों को हर वर्ष सीधा रोजगार मिलने वाला है। पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें..

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का पीएम मोदी ने किया अनावरण
1. गुजरात के केवड़िया में 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' के अनावरण के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि गुजरात का सीएम रहते जब इसकी कल्पना की थी तो अंदाजा नहीं था कि देश का पीएम रहते इस मूर्ति का अनावरण करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने गुजरात की जनता को धन्यवाद दिया और कहा- इस मिट्टी में पला-बढ़ा, य़े अवसर मुझे मिला, मैं धन्य हो गया।
2. उन्होंने कहा कि आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है, तब भारत ने न सिर्फ अपने लिए एक नया इतिहास रचा है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का गगनचुम्बी आधार भी रखा है। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा हमारी भावी पीढ़ियों को एक प्रेरणा देगी।
3. पीएम मोदी ने बताया कि सरदार साहब का सामर्थ्य तब भारत के काम आया था जब मां भारती साढ़े पांच सौ से ज्यादा रियासतों में बंटी थी। दुनिया में भारत के भविष्य के प्रति घोर निराशा थी। निराशावादियों को लगता था कि भारत अपनी विविधताओं की वजह से ही बिखर जाएगा।

'सरदार में कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य का समावेश था'
4. पीएम मोदी ने कहा, 'उन्होंने 5 जुलाई, 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए कहा था कि- विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, वैर का भाव, हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और न ही दोबारा किसी का गुलाम होना है। सरदार साहब के इसी संवाद से, एकीकरण की शक्ति को समझते हुए उन्होंने अपने राज्यों का विलय कर दिया। देखते ही देखते, भारत एक हो गया।
5. उन्होंने कहा कि सरदार पटेल में कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य का समावेश था, सरदार साहब के आह्वान पर देश के सैकड़ों रजवाड़ों ने त्याग की मिसाल कायम की थी। हमें इस त्याग को भी कभी नहीं भूलना चाहिए।
6. प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस कमज़ोरी पर दुनिया हमें उस समय ताने दे रही थी, उसी को ताकत बनाते हुए सरदार पटेल ने देश को रास्ता दिखाया। उसी रास्ते पर चलते हुए संशय में घिरा वो भारत आज दुनिया से अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है, दुनिया की बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की तरफ आगे बढ़ रहा है।

'सरदार के संकल्प के बिना भारत एक नहीं हो पाता'
7. सरदार पटेल के कार्यों के बारे में उन्होंने कहा कि ये केवल उनका संकल्प ही है जो हम कच्छ से कोहिमा तक, करगिल से कन्याकुमारी तक आज अगर बेरोकटोक जा पा रहे हैं तो ये सरदार साहब की वजह से संभव हो पाया है। सरदार साहब ने संकल्प न लिया होता, तो आज गीर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ में पूजा करने के लिए और हैदराबाद चार मीनार को देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता। सरदार साहब का संकल्प न होता, तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सीधी ट्रेन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
8. पीएम मोदी ने कहा कि ये प्रतिमा, सरदार पटेल के उसी प्रण, प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का प्रकटीकरण है। ये प्रतिमा उनके सामर्थ्य और समर्पण का सम्मान तो है ही, ये New India, नए भारत के नए आत्मविश्वास की भी अभिव्यक्ति है। ये प्रतिमा भारत के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को ये याद दिलाने के लिए है कि ये राष्ट्र शाश्वत था, शाश्वत है और शाश्वत रहेगा।

शिल्पकारों को पीएम मोदी ने दिया धन्यवाद
9. Statue of Unity हमारे इंजीनियरिंग और तकनीकि सामर्थ्य का भी प्रतीक है। बीते करीब साढ़े तीन वर्षों में हर रोज़ कामगारों ने, शिल्पकारों ने मिशन मोड पर काम किया है। उन्होंने कहा कि राम सुतार की अगुवाई में देश के अद्भुत शिल्पकारों की टीम ने कला के इस गौरवशाली स्मारक को पूरा किया है।
10. मूर्ति के बारे में उन्होंने कहा कि आज जो ये सफर एक पड़ाव तक पहुंचा है, उसकी यात्रा 8 वर्ष पहले आज के ही दिन शुरु हुई थी। 31 अक्टूबर 2010 को अहमदाबाद में उन्होंने इसका विचार सबके सामने रखा था। पीएम ने कहा कि करोड़ों भारतीयों की तरह तब उनके मन में एक ही भावना थी कि जिस व्यक्ति ने देश को एक करने के लिए इतना बड़ा पुरुषार्थ किया हो, उसको वो सम्मान आवश्य मिलना चाहिए जिसका वो हकदार है।












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