मेवे खाने से ताक़तवर होते हैं शुक्राणु

सूखे मेवे
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एक नए शोध में पता चला है कि सूखे मेवे खाने से पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन पुरुषों ने 14 हफ़्तों तक रोज़ाना दो मुट्ठी अखरोट, बादाम और हेज़ल नट खाए ना सिर्फ़ उनके शुक्राणुओं की ताक़त बढ़ गई बल्कि उनके तैरने की रफ़्तार में भी इज़ाफ़ा हुआ.

इस शोध के नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब पश्चिमी देशों के मर्दों के शुक्राणुओं की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है. इसे प्रदूषण, धूम्रपान और सेहत को नुक़सान पहुंचाने वाली ख़ुराक से जोड़कर देखा जा रहा है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि अच्छी और संतुलित ख़ुराक से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है.

हर सात में से एक दंपति को बच्चे पैदा करने में दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है. तक़रीबन आधे जोड़ों में इसकी वजह मर्द होते हैं.

वैज्ञानिकों ने 119 सेहतमंद पुरुषों पर शोध किया. उनकी उम्र 18 से 35 साल के बीच थी. इन मर्दों को दो समूहों में बांट दिया गया.

इसमें से एक समूह को रोज़ाना 60 ग्राम सूखे मेवे खाने को दिए गए जबकि दूसरे समूह की ख़ुराक पहले जैसी ही रखी गई.

इस शोध से वैज्ञानिकों ने पता किया कि मेवे खाने वाले मर्दों के शुक्राणुओं में 14 फ़ीसदी बढ़ोत्तरी हुई जबकि उनकी सेहत पहले से चार फ़ीसदी बेहतर हुई. यही नहीं, शुक्राणुओं के तैरने की ताक़त में भी छह फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस शोध से उन दूसरे शोधों की भी पुष्टि होती है जिनके मुताबिक ओमेगा-3, फैटी एसिड और एंटी ऑक्सीडेंट से युक्त भोजन खाने से प्रजनन क्षमता बेहतर होती है.

मेवों में ये सभी पोषक तत्व और अन्य पोषक तत्व होते हैं.

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शुक्राणु
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शुक्राणु

शोध करने वाले स्पेन की रोवीरा वर्जीली यूनिवर्सिटी के डॉक्टर अल्बर्ट सालास ह्यूतोस कहते हैं, "वैज्ञानिक सबूत इकट्ठे कर रहे हैं कि अच्छी ख़ुराक से प्रजनन क्षमता बेहतर करने में मदद मिलती है."

हालांकि वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि जिन मर्दों पर ये शोध किया गया है वो सेहतमंद थे और ये देखना अभी बाक़ी है कि कमज़ोर मर्दों पर इसके असर कैसे होंगे.

यूनीवर्सिटी ऑफ़ शेफ़ील्ड के पुरुषविज्ञान विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर एलन पेसी कहते हैं कि ऐसा भी हो सकता है कि मेवे खाने वाले मर्दों ने अपने जीवन में और कोई भी सकारात्मक बदलाव किए हों जिन्हें शोध में शामिल नहीं किया गया हो. प्रोफ़ेसर एलन शोधकर्ताओं में शामिल नहीं थे.

लंदन के एक पुरुष अस्पताल में क्लीनिकल एंब्रायोलॉजिस्ट रहीं डॉ. वर्जीनिया बॉल्टन का कहना है कि शोध के नतीजे सैद्धांतिक तौर पर तो रोचक हैं लेकिन ये कहना नामुमकिन है कि उनका गर्भाधान की संभावना बढ़ाने में क्या योगदान हो सकता है.

वो कहती हैं, "लेकिन जब तक हमें सभी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते हमें अपने मरीज़ों से कहना चाहिए कि वो धूम्रपान और शराब पीना छोड़ दें, अच्छा खाएं और सेहतमंद जीवन जिएं."

शोध के ये नतीजे बार्सीलोना में यूरोपियन सोसायटी ऑफ़ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एंब्रायोलॉजी की बैठक में पेश किए गए.

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