14 साल से न्यायिक हिरासत बंद हत्या के मामले में दोषी व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
14 साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने वाले हत्या के मामले में दोषी एक व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी।
नई दिल्ली, 1 मार्च। 14 साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने वाले हत्या के मामले में दोषी एक व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि उसकी अपील 2012 से ही इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है और वह पहले ही 14 साल और 3 महीने की हिरासत में है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने रितु पाल को इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जमानत दे दी कि याचिकाकर्ता पहले ही 14 साल 3 महीने की वास्तविक और छूट के साथ कुल 17 साल से हिरासत में है। अदालत ने कहा कि सह-आरोपियों को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है जबकि रितु पाल की जमानत याचिका 2012 से उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत ने कहा कि हम उसे जमानत के लिए उपयुक्त मामला मानते हैं।
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आरोपी रितु पाल की तरफ से अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने कोर्ट में अपनी सफाई पेश की। ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में रितु पाल की याचिका बहुत ही भयावह तथ्य और बहुत ही खेदजनक स्थिति प्रदर्शित करती है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे उसके 2004 के कृत्य के लिए 14 जनवरी, 2008 को आईपीसी की धारा 302 और धारा 34 के तहत दोषी करार दिया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट में उसकी जमानत का आवेदन साल 2012 से ही लंबित है।
एडवोकेट मल्होत्रा ने कहा कि याचिकाकर्ता आज तक न्यायिक हिरासत में है और 11 नवंबर, 2021 को पहले ही 14 साल और 3 महीने की वास्तविक हिरासत और 17 साल और 3 महीने की कुल हिरासत में रह चुका है। जबकि सह-अभियुक्तों को 28 मार्च 2014 के आदेश के तहत उच्च न्यायालय के समक्ष उनकी अपील लंबित रहने तक जमानत पर रिहा कर दिया गया है, याचिकाकर्ता की दूसरी जमानत याचिका 2012 से उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है।
गौरतलब है कि रितु पाल को 14 जनवरी 2008 को उत्तर प्रदेश की बागपत अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह फरवरी 2014 में बागपत जिले में एक व्यक्ति की हत्या के लिए हत्या के आरोपों का सामना कर रहा था। उसने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।












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