2 करोड़ लखपति दीदी ही नहीं, महिलाओं से जुड़ी मोदी सरकार की इन तमाम योजानाएं के बारे में जानिए

केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का जो विशेष सत्र बुलाया है, उसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसमें से एक महिला आरक्षण विधेयक भी है, जो लगभग तीन दशकों से घोर राजनीति की धूल फांक रहा है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार शुरुआती दिनों से ही महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर फोकस करती आई है। खुले में शौच से मुक्ति दिलाना हो या उज्जवला योजना या फिर जनधन बैंक अकाउंट, पीएम मोदी ने महिला कल्याण के लिए गंभीरता से काम किया है।

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2 करोड़ लखपति दीदी
इस साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने लाल किले से दो करोड़ महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी योजना का ऐलान किया है। पीएम मोदी ने देश के गांवों में 2 करोड़ लखपति दीदी बनाने की बात कही है। कमाल की बात है कि इस योजना को साइंस और टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया है। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ट्रेनिंग दी जानी है। वह ड्रोन चलाएंगी, ड्रोन को रिपेयरिंग कर सकेंगी। इस योजना के तहत 15 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि क्षेत्र से जोड़ना है। यह देश के कृषि क्षेत्र के लिए तो क्रांति की तरह है ही, इसमें महिलाओं के बारे में ग्रामीण सोच बदलने की भी क्षमता है।

मोदी सरकार और महिला कल्याण
आज की तारीक में देश के 4 लाख 32 हजार से ज्यादा गांव खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त हैं। इस समस्या की सबसे बड़ी पीड़ित देश की आधी आबादी ही रही है। इसी तरह लगभग 9.6 करोड़ महिलाओं को उज्जवला योजना के तहत मुफ्त में गैस कनेक्शन दिया गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 3.18 करोड़ से अधिक अकाउंट खोले जा चुके हैं।

करीब पौने दो करोड़ महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के तहत घर मिला है। वहीं पीएम आवास योजना के तहत 70% से ज्यादा आवास या तो अकेले महिलाओं के नाम पर दिया गया है या फिर वह उसकी सह-मालिक हैं।

महिलाओं का आर्थिक तौर पर सक्षम बनाने की पहल
27 करोड़ से अधिक जनधन बैंक खाते खोले गए हैं। करीब इतने ही महिलाओं को मुद्रा लोन दिया गया है, जिससे वह अपना छोटा-मोटा व्यवसाय कर रही हैं। आर्थिक रूप से महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए महिला ई-हाट की भी व्यवस्था है। इसी तरह से आर्थिक तौर पर महिलाओं को समर्थ बनाने के लिए उनके एमएसएमई रजिस्ट्रेशन में भी अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज हुई है।

महिलाओं का स्वास्थ्य
इसी तरह से पोषण अभियान भी चलाया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण का बहुत बड़ा आधार बना है। 10 करोड़ से भी ज्यादा महिलाएं इसकी लाभार्थी बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनाओं का लाभ 3.03 करोड़ से अधिक महिलाओं को मिला है।

मुस्लिम महिलाओं का कल्याण
अगर मुस्लिम महिलाओं की बात करें तो ट्रिपल तलाक को कानूनी तौर पर खत्म करके मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों की आधी आबादी को सम्मान के साथ जीने का एक बड़ा हौसला दिया है। इसी तरह से पवित्र हज की यात्रा पर जाने की इच्छुक मुस्लिम महिलाओं के लिए पुरुष अभिभावकों की अनिवार्यता भी खत्म की गई है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से महिला सशक्तिकरण की जो कुछ और महत्वपूर्ण योजनाएं चल रही हैं, उनमें महिला सुरक्षा के मद्देनजर वन स्टॉप सेंटर भी शामिल है। जबकि, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना इसके पहले कार्यकाल की सफल योजनाओं में शामिल है, जिसका प्रभाव हरियाणा जैसे राज्य में भी दिख चुका है। इसके साथ ही शहरी महिलाओं के लिए वर्किंग वुमेन होस्टल और ग्रामीण महिलाओं के लिए महिला शक्ति केंद्र को भी प्रोत्साहित किया गया है।

ऐसे में संसद और राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का विधेयक अगर मोदी सरकार लाई और उसे पास कराने में कामयाब रही तो यह उसकी बहुत बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। अगर चुनावी राजनीति के गणित के हिसाब से देखें तो यह 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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