विवेक तिवारी के परिजनों से मिले अखिलेश यादव, कहा- खत्म हो BJP की एनकाउंटर संस्कृति

सोमवार को सपा मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मृतक विवेक तिवारी के परिजनों से उनके घर जाकर मुलाकात की। परिजनों से मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने जहां आर्थिक मदद की पेशकश की, वहीं भाजपा सरकार पर भी हमला बोला।

नई दिल्ली। यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाने वाले लखनऊ के विवेक तिवारी मर्डर केस में अब सियासत भी तेज हो गई है। इस मामले को लेकर यूपी की योगी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। सोमवार को सपा मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मृतक विवेक तिवारी के परिजनों से उनके घर जाकर मुलाकात की। परिजनों से मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने जहां आर्थिक मदद बढ़ाने की मांग की, वहीं भाजपा सरकार पर भी हमला बोला।

'देनी चाहिए 5 करोड़ की मदद'

'देनी चाहिए 5 करोड़ की मदद'

मृतक विवेक तिवारी के परिजनों से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'स्व० विवेक तिवारी जी के परिवार से मिलकर उनके दर्द को करीब से जाना। सरकार ने जिनका सहारा छीना है, उनके परिवार को 5 करोड़ की आर्थिक मदद देनी ही चाहिए। साथ ही फर्जी एनकाउंटर में मारे गए अन्य लोगों के परिवार को भी मदद पहुंचानी चाहिए। भाजपा की ये एनकाउंटर संस्कृति समाप्त होनी चाहिए।'

'निवेशकों की निगाह में यूपी की छवि विकृत'

'निवेशकों की निगाह में यूपी की छवि विकृत'

अखिलेश यादव इससे पहले भी इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साध चुके हैं। घटना के बाद अखिलेश ने ट्वीट किया था, 'उप्र में पुलिस ने एक आम आदमी की हत्या करके साबित कर दिया है कि भाजपा सरकार में ‘एनकाउंटर' की हिंसात्मक संस्कृति कितनी विकृत हो गयी है। एक मल्टीनेशनल कंपनी के एम्पलॉयी के मारे जाने से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की निगाह में भी प्रदेश की छवि विकृत हुई है। निंदनीय. हार्दिक संवेदना'

क्या हुआ था शुक्रवार की रात

क्या हुआ था शुक्रवार की रात

आपको बता दें कि यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात प्रशांत चौधरी ने बीते शुक्रवार की रात लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मार दी थी। घटना के वक्त एक दूसरा सिपाही संदीप कुमार भी प्रशांत के साथ मौजूद था। इस घटना से यूपी की सियासत में भी भूचाल आ गया। आरोप है कि घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में इस मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन जब मामला मीडिया में आया तो आनन-फानन में आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजा गया।

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