यूपी में मोदी के इन 6 मंत्रियों पर भारी पड़ सकता है अखिलेश-मायावती का गठबंधन!

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। एक दूसरे की धुर विरोधी रही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी करीब 25 साल बाद एक बार फिर से महागठबंधन बनाकर एक साथ आए हैं। मायावती और अखिलेश यादव के एक साथ आने का सीधा असर कहीं न कहीं केंद्र में सत्ता संभाल रही बीजेपी पर पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 72 पर जीत दर्ज की थी। तीन सीटें बीजेपी की सहयोगी रही अपना दल के खाते में गई थी। हालांकि इस बार सपा-बसपा के एक साथ आने से पूरा सियासी समीकरण बदल गया है। इसका असर जहां बीजेपी के पिछले प्रदर्शन पर पड़ सकता है, वहीं मोदी कैबिनेट के करीब आधा दर्जन से ज्यादा मंत्रियों की सीटें भी इस बदलाव में फंस सकती हैं।

मोदी कैबिनेट में यूपी से हैं कुल 12 केंद्रीय मंत्री

मोदी कैबिनेट में यूपी से हैं कुल 12 केंद्रीय मंत्री

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में इस समय कुल 12 केंद्रीय मंत्री उत्तर प्रदेश से हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद यूपी की वाराणसी लोकसभा सीट से सांसद हैं। उनके अलावा केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ल राज्यसभा के सदस्य हैं। इनके अलावा मोदी कैबिनेट में 11 मंत्री लोकसभा चुनाव जीतकर आए हैं। यानी इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन की वजह से इन सभी मंत्रियों को अपनी तैयारी मजबूत करनी होगी। 2014 के आंकड़ों और पुराने वोटिंग पैटर्न पर गौर करें तो करीब 6 केंद्रीय मंत्रियों की मुश्किलें इस चुनावी गठबंधन की वजह से बढ़ सकती हैं। एक नजर उन सीटों पर...

केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की सीट गाजीपुर

केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की सीट गाजीपुर

गाजीपुर लोकसभा सीट का हाल देखें तो यहां 2014 आम चुनाव में मनोज सिन्हा को कुल 3 लाख 6 हजार 929 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे सपा उम्मीदवार को 2 लाख 74 हजार और तीसरे नंबर पर बसपा कैंडिडेट को दो लाख 41 हजार वोट आए। अब सपा-बसपा गठबंधन के बाद इन आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो कुल पांच लाख 41 हजार से ज्यादा होता है, जो मनोज सिन्हा को आए कुल वोटों से कहीं ज्यादा है।

उमा भारती की सीट झांसी

उमा भारती की सीट झांसी

2014 लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री उमा भारती झांसी से सांसद बनीं, हालांकि इस बार उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। ऐसे में अगर पार्टी उनकी जगह जिसे भी इस सीट से उम्मीदवार बनाएगी उसे भी सपा-बसपा महागठबंधन में मजबूत दावेदारी के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। पिछले चुनाव में उमा भारती को पांच लाख 75 हजार वोट मिले थे। दूसरी ओर सपा उम्मीदवार को 3 लाख 85 हजार और बसपा उम्मीदवार को दो लाख 13 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, यानी सपा-बसपा का वोट मिला दिया जाए तो इस बार यहां से बीजेपी की ओर से दावेदारी करने वाले उम्मीदवार की राह आसान नहीं होगी।

केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज की सीट

केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज की सीट

केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज यूपी के शाहजहांपुर सुरक्षित सीट से बीजेपी की सांसद हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में उन्हें कुल 5 लाख 25 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, वहीं दूसरे नंबर पर रही बीएसपी को दो लाख 89 हजार और सपा उम्मीदवार को दो लाख 42 हजार से ज्यादा वोट आए। सपा-बसपा के साथ आने के बाद इस बार अगर 2014 जैसा ही वोटिंग पैटर्न रहा तो सीधा असर बीजेपी उम्मीदवार पर होगा और उन्हें जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

सत्यपाल सिंह की सीट बागपत

सत्यपाल सिंह की सीट बागपत

केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह पश्चिमी यूपी के बागपत से बीजेपी सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में वो पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे और बड़ी जीत दर्ज करते हुए संसद पहुंचे। उस समय उन्हें कुल 4 लाख 23 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। 2014 में सपा और बसपा अलग-अलग चुनाव मैदान में थे। ऐसे में सपा के उम्मीदवार को 2 लाख 13 हजार से ज्यादा वोट मिले, वहीं बीएसपी उम्मीदवार को 1 लाख 41 हजार से ज्यादा मत मिले। यहां तीसरे नंबर आरएलडी के अजित सिंह रहे, जिन्हें 1 लाख 99 हजार वोट मिले। हालांकि इस बार जिस तरह से सपा-बसपा का महागठबंधन बना है, इसमें अगर आरएलडी अभी शामिल नहीं है। अगर आरएलडी भी महागठबंधन में आ जाती है तो सत्यपाल सिंह के लिए की राह आसान नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि सपा-बसपा और आरएलडी के साथ आने से वोट फीसदी 55.23 हो जाता है।

साध्वी निरंजन ज्योति की लोकसभा सीट फतेहपुर

साध्वी निरंजन ज्योति की लोकसभा सीट फतेहपुर

सपा-बसपा गठबंधन का असर केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की फतेहपुर सीट भी नजर आ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि 2014 लोकसभा चुनाव में साध्वी निरंजन ज्योति को 4 लाख 85 हजार से ज्यादा वोट आए थे। वहीं दूसरे नंबर रहे बसपा उम्मीदवार को दो लाख 98 हजार और तीसरे नंबर रहे सपा उम्मीदवार को एक लाख 78 हजार से ज्यादा सीटें आई। अगर सपा-बसपा उम्मीदवारों के वोटों को जोड़ दिया जाए तो भी आंकड़ा साध्वी निरंजन ज्योति को मिली सीटों से कम रहता है। हालांकि इस बार एंटी इंकमबेंसी फैक्टर भी होगा, ऐसे में बीजेपी को अपनी ये सीट निकालने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा की गौतमबुद्ध नगर सीट

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा की गौतमबुद्ध नगर सीट

2014 लोकसभा चुनाव में महेश शर्मा को गौतमबुद्ध नगर सीट से शानदार जीत मिली थी। उस समय उन्हें कुल 5 लाख 99 हजार 702 वोट मिले थे। दूसरे नंबर सपा उम्मीदवार थे, जिन्हें 3 लाख, 19 हजार से ज्यादा वोट आए, तीसरा स्थान बीएसपी उम्मीदवार का रहा जिनके खाते में एक लाख 98 हजार से ज्यादा वोट आए। यानी सपा-बसपा उम्मीदवारों के वोटों को मिला भी दें तो भी महेश शर्मा अपनी सीट बचाते नजर आ रहे हैं। हालांकि इस बार सियासी समीकरण थोड़े अलग हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि गौतमबुद्ध नगर की जनता किस पर अपना भरोसा जताएगी।

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