Soumitra Chatterjee Profile: 'सत्यजीत रे' को अपना आदर्श मानते थे अभिनेता सौमित्र चटर्जी, नेशनल अवार्ड लेने से किया था मना

नई दिल्ली। मशहूर अभिनेता सौमित्र चटर्जी (Soumitra Chatterjee) का लंबी बीमारी के बाद आज कोलकाता में निधन हो गया, 85 वर्ष की अवस्था में दुनिया को अलविदा कहने वाले सौमित्र चटर्जी पिछले 40 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे, कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद अभिनेता सौमित्र चटर्जी को 6 अक्टूबर को कोलकाता के बेले व्यू क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। अभिनेता 40 दिनों से हॉस्पिटल में एडमिट थे। दिग्गज अभिनेता के निधन पर कई मशहूर हस्तियों में गहरा शोक प्रकट किया है तो वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने Tweet किया है कि 'सौमित्र चटर्जी के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक दिग्गज अभिनेता को खो दिया है। उन्होंने अभिनय कला के क्षेत्र में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है।'

सत्यजीत रे को अपना आदर्श मानते थे अभिनेता सौमित्र चटर्जी

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    तो वहीं पीएम मोदी ने अभिनेता के निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि 'सौमित्र चटर्जी का निधन विश्व सिनेमा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और पूरे देश के सांस्कृतिक जीवन के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उनके निधन से अत्यंत दुख हुआ है। परिजनों और प्रशंसकों के लिए मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!', तो वहीं सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि सौमित्र चटर्जी का निधन से अंतरराष्ट्रीय, भारतीय और बंगाली सिनेमा ने अपना दिग्गज खो दिया है। पूरे बंगाल के लिए आज दुख का दिन है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

    सौमित्र चटर्जी ने 300 फिल्मों में काम किया

    आपको बता दें कि 'सत्यजीत रे' को अपना आदर्श मानने वाले सौमित्र चटर्जी (Soumitra Chatterjee) ने 'सत्यजीत रे' की 14 फिल्मों समेत कुल 300 फिल्मों में काम किया, समांतर फिल्मों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाले चटर्जी केवल एक एक्टर ही नहीं बल्कि एक मंझे हुए लेखक और निर्देशक भी थे । चटर्जी ने साल 1959 में फिल्म 'अपुर' से अपना फिल्मी सफर शुरू किया था, इन्होंने 'सत्यजीत रे' के साथ उनकी देवी (1960), अभिजन (1962), अर्यनेर दिन रात्रि (1970), घरे बायरे (1984) और सखा प्रसखा (1990) जैसी चर्चित फिल्मों में काम किया था।

    'एकसान पत्रिका' का किया था संपादन

    अपने काम से कभी कोई समझौता ना करने वाले सौमित्र चटर्जी (Soumitra Chatterjee) ने कई बार बॉलीवुड की फिल्मों में काम करने से मना किया था उन्होंने 'एकसान पत्रिका' का भी किया था, पर्दे पर कई तरह के किरदारों में नजर आने वाले सौमित्र चटर्जी (Soumitra Chatterjee) स्पष्ट वक्ता कहे जाते थे, उन्होंने दो बार 'पद्मश्री पुरस्कार' और 2001 में 'राष्ट्रीय पुरस्कार' लेने से भी मना कर दिया था क्योंकि उन्हें जूरी की कई बातों पर एतराज था।

    'दादा साहेब फाल्के अवार्ड' से सम्मानित थे सौमित्र चटर्जी

    मालूम हो कि 1935 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे एक्टर चटर्जी को साल 2012 में भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च पुरस्कार 'दादा साहेब फाल्के अवार्ड' से भी सम्मानित किया गया था तो वहीं चटर्जी को दो बार 'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्का'र मिला था, यही नहीं 1998 में उन्हें 'साहित्य अकादमी अवार्ड' और साल 2004 में 'पद्म भूषण' से नवाजा गया था, चटर्जी के जाने से आज एक सिनेमा के युग का अंत हुआ है, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।

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