एक और मामले में पिछड़े राहुल, सोनिया गांधी से भी हारे
नई दिल्ली। जनता अपने नेताओं को चुनकर लोकसभा और विधानसभाओं में भेजती है ताकि वो उनके लिए काम करें लेकिन हाल ही में जो आंकड़े आए हैं वो चौंकाने वाले हैं। देश भर को बदल डालने का दावा करने वाले नेता वो चाहे कोई भी क्यों ना हों सदन नहीं जाना चाहते।
इसकी वजह तो उन्हें ही पता होगी लेकिन इससे विकास और सदन का काम तो प्रभावित होता ही होगा। आईए आपको बताते हैं उन आंकड़ों के बारे में जो हाल ही में जारी किए गए हैं।

सोनिया की अटेंडेंस रही ज्यादा
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की संसद में उपस्थिति उनके बेटे और पार्टी में उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी बेहतर है। सदन में जहां सोनिया की उपस्थिति 59 फीसदी रही वही राहुल गांधी 54 फीसदी ही मौजूद रहे। बीते तीन साल में सोनिया ने 5 और राहुल ने 11 बहसों में हिस्सा लिया। बीते तीन साल में सिर्फ 3 ऐसे संसद सदस्य रहे जिनकी उपस्थिति 100 फीसदी रही है। उत्तर प्रदेश के बांदा से सांसद भैरव प्रसाद मिश्रा ने 3 साल की सभी 1,468 बहसों और चर्चाओं में हिस्सा लेकर 100 फीसदी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री, मंत्री और नेता विपक्ष को छूट
निचले सदन में 22 सांसद ऐसे रहे हैं जिनकी उपस्थिति आधे से भी कम रही है। प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि उनका उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना आवश्यक नहीं होता। विपक्ष के नेता को भी इसकी छूट मिली हुई है। पीआरएस लेजिस्लेटिव की ओर से उपलब्ध कराए गए डाटा के अनुसार 545 में से करीब 25 फीसदी यानी 133 सांसद ऐसे रहे जिनकी उपस्थिति 90 फीसदी के पार रही। वहीं सभी सांसदों की उपस्थिति का औसत 80 फीसदी रहा है।

वीरप्पा, खड़गे की अटेंडेंस भी है ज्यादा
कांग्रेस के विरप्पा मोइली और मल्लिकर्जुन खड़गे, जो लोकसभा में पार्टी के नेता है उनकी सदन में उपस्थिति क्रमशः 91 और 92 फीसदी रही है हालांकि पार्टी के ही युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजीव सातव लोकसभा में क्रमशः 80 और 81 फीसदी ही उपस्थित रहे। वहीं 4 सांसद जिनकी 100 फीसदी उपस्थिति है उनमें बीजू जनता दल से कुलमनी समल और भाजपा के गोपाल सेट्टी, किर्ती सोलंकी और रमेश चंदर कौशिक शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की सदन में उपस्थिति 79 फीसदी रही है। वही उनकी बहु डिंपल यादव की उपस्थिति मात्र 35 फीसदी है।

योगी की उपस्थिति 72 फीसदी
वहीं पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जिन्होंने दिसंबर 2016 में सदन से इस्तीफा दिया उनकी उपस्थिति मात्र 6 फीसदी रही। जम्मू और कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जिन्होंने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद कश्मीर के मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के लिए जनवरी 2016 में इस्तीफा दिया था उनकी उपस्थिति 31 फीसदी रही।
19 मार्च को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ जिन्होंने अभी तक सदन से इस्तीफा नहीं दिया है उनकी उपस्थिति 72 फीसदी रही है।

50 फीसदी थी विनोद खन्ना की उपस्थिति
इन सबमें मध्य प्रदेश से भाजपा के लोकसभा सांसद ज्ञान सिंह की उपस्थिति 8 फीसदी और अभिनेता से नेता बनी पश्चिम बंगाल से भाजपा सांसद की उपस्थिति मात्र 9 फीसदी है। दिलचस्प बात यह है कि अभिनेता से नेता बने लोगों की सदन में उपस्थिति अभी भी कम है। भाजपा के पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री विनोद खन्ना जिनका इसी साल अप्रैल में निधन हुआ उनकी सदन में उपस्थिति 50 फसदी रही।
पंजाब के गुरूदासपुर से सांसद रहे खन्ना ने बीते बजट सत्र के आधे समय में मौजूद रहे।

मथुरा सांसद हेमा मालिनी सिर्फ 35 पर्सेंट!
मथुरा से सांसद हेमा मालिनी भी सिर्फ 35 फीसदी ही उपस्थित रहीं वहीं चंडीगढ़ से सांसद किरण खेर 86 फीसदी, अरुंधति राय पर ट्वीट कर विवादों में फंसे परेश रावल 68 फीसदी सदन में उपस्थित रहे। भोजपुरी गायक और भाजपा के दिल्ली इकाई के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी सदन में 77 फीसदी उपस्थित रहे। आम आदमी पार्टी से सांसद भगवंत मान सदन में 52 फीसदी उपस्थित रहे। बिहार के पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा सदन में मौजूद तो 70 फीसदी रहे लेकिन उन्होंने ना तो किसी बहस में हिस्सा लिया ना ही कोई सवाल पूछा। तृणमूल कांग्रेस से सांसद मुनमुन सेन भी सदन में 70 फीसदी उपस्थित रहीं।












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