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सोहराबु्द्दीन शेख एनकाउंटर केस: कैसे, कब, कहां, क्या, जानिए पूरा मामला

मुंबई। मुंबई के सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ हत्या और षड़यंत्र रचने जैसे कोई पुख्ता सबूत नहीं मिलने की वजह से उन्हें बरी किया गया। ज्यादातर आरोपियों में से राजस्थान और गुजरात के पुलिस अधिकारी थे। सीबीआई ने अपने चार्जशीट में 38 लोगों का आरोपी बनाया था, जिसमें बीजेपी चीफ अमित शाह, पूर्व डीजी वंजारा और 16 अन्य हाई प्रोफाइल लोग थे। सीबीआई का आरोप था कि अपने राजीनितिक फायदे के लिए इस प्रकार के खतरनाक षडयंत्र को रचा गया था। हालांकि, कोर्ट के सामने सीबीआई सबूत पेश करने में नाकाम साबित हुई है। एक नजर डालते हैं कि क्या था सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर केस...

ऐसे मारा गया सोहराबुद्दीन

ऐसे मारा गया सोहराबुद्दीन

26 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन शेख नाम के एक शख्स को गुजरात पुलिस की एक टीम ने गोली मार दी थी। पुलिस ने दावा किया था कि सोहराबुद्दीन लश्कर-ए-तोयबा आतंकवादी संगठन का संचालक था और वह पाकिस्तान की आईएसआई खुफिया एजेंसी के साथ गुजरात में एक वरिष्ठ नेता की हत्या की योजना बना रहा था, जिसमें संभवतः नरेंद्र मोदी (उस वक्त मुख्मयंत्री) और अमित शाह जैसे हाई प्रोफाइल लीडर की भी हत्या की योजना थी। राजस्थान और गुजरात पुलिस ने एक ज्वॉइंट ऑपरेशन में अहमदाबाद के पास विशाल सर्किल पर सोहराबुद्दीन को मार गिराया था। पुलिस का आरोप था कि सोहराबुद्दीन को पुलिस को रुकने के लिए कहा था, लेकिन वह भाग निकला और जब पुलिस ने उसका पीछा किया तो उसने पुलिस पर ही गोलियां चला दी थी। पुलिस का दावा है कि उन्होंने अपनी आत्मरक्षा के लिए गोलियां चलाई थी, जिसमें वह मारा गया।

सोहराबुद्दीन की पत्नी और तुलसीराम प्रजापति को मार गिराय गया

सोहराबुद्दीन की पत्नी और तुलसीराम प्रजापति को मार गिराय गया

सीबीआई का आरोप है सोहराबुद्दीन की हत्या से चार दिन पहले यानि की 22 नवंबर को सोहराबु्द्दीन की पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति का पुलिस ने एक बस से अपहरण कर दिया था, जो हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली की तरफ जा रहे थे। सीबीआई का आरोप है कि गुजरात के बनासकांठा जिले के एक गांव में कौसर का पहले रेप हुआ और फिर कथित रूप से 29 नवंबर 2005 को उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि, इसके दो दिन पहले यानि 27 नवंबर को गुजरात-राजस्थान की सीमा पर दोनों राज्यों की पुलिस ने एक ज्वॉइंट ऑपरेशन में तुलसीराम प्रजापति का एनकाउंट कर दिया था। पुलिस का आरोप है कि जब तुलसीराम प्रजापति को सुनवाई के दौरान कोर्ट लाया जा रहा था, तब वह भागने की कोशिश करने लगा और तभी एनकाउंटर में उसे मार गिराया गया।

कोर्ट में आजम खान बना गवाह

कोर्ट में आजम खान बना गवाह

सीबीआई ने इस केस में अमित शाह और गुजरात पुलिस ऑफिसर अभय चुदसामा, राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, पूर्व गुजरात पुलिस चीफ पीसी पांडे और सीनियर पुलिस ऑफिसर गीता जौहरी जैसे लोगों का नाम भी शामिल किया था। हालांकि, 2014 की सुनवाई में कोर्ट ने 38 में से 16 लोगों को बरी कर दिया था, जिसमें अमित शाह जैसे नेताओं और अन्य पुलिस अधिकारियों को बेगुनाह बताया था। यह केस राजनीति की वजह से प्रभावित न हो इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को 2012 में गुजरात से मुंबई ट्रांसफर कर दिया था। अभियोजन पक्ष के गवाह बने आजम खान ने दावा किया है कि सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति मार्च 2003 में राज्य के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्य की हत्या सहित अन्य प्रमुख अपराधों में शामिल थे।

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